घुमंतू समाज के लिए बनेगा विकास बोर्ड: CM योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि घुमंतू विकास बोर्ड से विमुक्त एवं घुमंतू समाज को सम्मान, सरकारी योजनाओं का लाभ और विकास के अवसर मिलेंगे।

News saga Desk

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विमुक्त एवं घुमंतू समाज के कल्याण को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब घुमंतू समाज को दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। सरकार उन्हें सम्मानजनक जीवन, सरकारी योजनाओं का लाभ और विकास के समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि घुमंतू विकास बोर्ड केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि लंबे समय से उपेक्षित समाज को न्याय, सम्मान और अवसर दिलाने का प्रभावी माध्यम बनेगा।

प्रदेश कैबिनेट की ओर से घुमंतू विकास बोर्ड के गठन के निर्णय के बाद गुरुवार को आयोजित आभार एवं अभिनंदन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह बात कही। कार्यक्रम में विमुक्त एवं घुमंतू समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया और बोर्ड के गठन के फैसले के लिए आभार जताया।

हर समुदाय की आवाज सरकार तक पहुंचेगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि घुमंतू विकास बोर्ड की संरचना में विभिन्न विमुक्त और घुमंतू जातियों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि समाज के अलग-अलग समुदायों की समस्याएं सीधे सरकार तक पहुंचें और उनके समाधान के लिए प्रभावी योजनाएं तैयार की जा सकें।

 घुमंतू समाज

उन्होंने कहा कि बोर्ड का गठन जल्द पूरा किया जाएगा। इसके माध्यम से घुमंतू समाज के लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने की दिशा में काम किया जाएगा।

1871 के कानून का किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में अंग्रेजी शासन के दौरान लागू किए गए 1871 के क्रिमिनल ट्राइब एक्ट का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस कानून के जरिए कई ऐसे समुदायों को अपराधी घोषित कर दिया गया था, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उन्होंने कहा कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेजों ने सुनियोजित तरीके से इन समुदायों पर कलंक लगाया, जिससे उनका सामाजिक सम्मान प्रभावित हुआ। स्वतंत्र भारत में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने इस अन्याय को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इन समुदायों को विमुक्त जाति का सम्मान मिला।

मुख्यमंत्री के अनुसार, हालांकि इन समुदायों के समुचित विकास के लिए लंबे समय तक अपेक्षित प्रयास नहीं हुए। अब सरकार उनके विकास को प्राथमिकता दे रही है।

पिछले साल की घोषणा अब आगे बढ़ी

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष आयोजित घुमंतू समाज के सम्मेलन में बोर्ड गठन की मांग उनके सामने रखी गई थी। उस समय उन्होंने बोर्ड बनाने की घोषणा की थी। अब इसके गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

उन्होंने कहा कि बोर्ड की संरचना में विभिन्न समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा, जिससे उनकी आवाज सीधे शासन तक पहुंचे। सरकार का प्रयास होगा कि घुमंतू समाज से जुड़ी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक प्रभावी ढंग से पहुंचे।

सरकारी योजनाओं से जोड़ने का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वनटांगिया, मुसहर, थारू, गौड़, चेरो, बुक्सा, कोल और सहरिया समेत कई वंचित समुदायों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का काम किया है।

उन्होंने राशन कार्ड, भूमि पट्टे, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास, आयुष्मान भारत कार्ड, बिजली और गैस कनेक्शन तथा वृद्धावस्था, निराश्रित महिला और दिव्यांगजन पेंशन जैसी योजनाओं का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रत्येक पात्र व्यक्ति को जनकल्याणकारी योजनाओं से शत-प्रतिशत जोड़ना है।

सपेरा समाज का भी किया उल्लेख

मुख्यमंत्री योगी ने सपेरा समाज का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह समुदाय लंबे समय से पारंपरिक जीवनशैली और गुरु गोरखनाथ की परंपरा से जुड़ा रहा है।

उन्होंने कहा कि पुराने समय में संचार के आधुनिक साधन उपलब्ध नहीं होने पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों और लोक माध्यमों के जरिए लोगों को जागरूक करने में ऐसे समुदायों की भूमिका रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सपेरा समाज के सम्मानजनक पुनर्वास और समग्र विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है।

इसे भी देखे- Durga Puja 2026: रांची में चंद्रशेखर आजाद दुर्गा पूजा समिति का भूमि पूजन और खूंटी पूजन

‘घुमंतू से टिकंतू हो रहा समाज’

कार्यक्रम में समाज कल्याण राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण ने घुमंतू विकास बोर्ड के गठन को ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि यह बोर्ड विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं और विमुक्त एवं घुमंतू समाज के बीच सेतु का काम करेगा।

उन्होंने कहा कि अब स्थिति बदल रही है और लोग कहने लगे हैं कि यह समाज ‘घुमंतू’ नहीं, बल्कि ‘टिकंतू’ हो रहा है। उनके अनुसार, कई परिवारों के पास अब घर, बिजली और आजीविका के साधन उपलब्ध हो रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान सपेरा समाज के लोगों ने पारंपरिक बीन और अन्य वाद्य यंत्र बजाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्वागत किया। उपस्थित लोगों ने मुख्यमंत्री के समर्थन में नारे लगाए और घुमंतू विकास बोर्ड के गठन के लिए उनका आभार जताया।

समाज के प्रतिनिधियों ने बोर्ड को अपने लिए ऐतिहासिक कदम बताया। सुभाष जोगी ने कहा कि उनका समाज लंबे समय से उपेक्षा का सामना करता रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की घोषणा के बाद अब बोर्ड गठन की प्रक्रिया शुरू होना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है।

विमुक्त और घुमंतू समाज के विभिन्न समुदाय लंबे समय से सामाजिक पहचान, स्थायी आवास, शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं तक पहुंच जैसी समस्याओं का सामना करते रहे हैं। ऐसे में विकास बोर्ड की स्थापना को इन समुदायों की समस्याओं के लिए संस्थागत व्यवस्था तैयार करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।

सरकार की ओर से बोर्ड में विभिन्न समुदायों को प्रतिनिधित्व देने की बात कही गई है, जिससे उनकी स्थानीय और सामाजिक समस्याओं को नीति निर्माण तक पहुंचाने की संभावना बढ़ सकती है।

घुमंतू विकास बोर्ड के प्रभावी तरीके से काम करने पर समुदाय के लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। साथ ही आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का रास्ता खुल सकता है।

हालांकि, बोर्ड की वास्तविक प्रभावशीलता उसके गठन के बाद तय होने वाली संरचना, अधिकारों और योजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि घुमंतू विकास बोर्ड के जरिए विमुक्त एवं घुमंतू समाज को सम्मानजनक जीवन और विकास के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बोर्ड में सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की बात कही।

समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण ने भी बोर्ड को समाज के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। फिलहाल बोर्ड के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सरकार की ओर से इसके जल्द पूरा होने की बात कही गई है। आने वाले समय में इसकी संरचना और जिम्मेदारियों को लेकर अधिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

Read More News

Read More