जेपीएससी जेएसएससी भर्ती धांधली के विरोध में छात्रों का आंदोलन जारी है। आज जयपाल सिंह स्टेडियम से संविधान मार्च निकलेगा, सीबीआई जांच की मांग उठेगी।
जेपीएससी जेएसएससी भर्ती धांधली को लेकर झारखंड में छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से सत्याग्रह पर बैठे हैं और पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। अब जेपीएससी जेएसएससी भर्ती धांधली के विरोध में चल रहा यह आंदोलन मोरहाबादी मैदान से स्थानांतरित होकर जयपाल सिंह स्टेडियम के समीप आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही आज छात्रों की ओर से संविधान मार्च भी निकाला जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है।

छात्रों का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे इस आंदोलन का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और युवाओं को न्याय दिलाना है। उनका आरोप है कि कई दिनों से आंदोलन जारी रहने के बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
डूरंड कप के कारण बदला आंदोलन का स्थान
अब तक छात्र मोरहाबादी मैदान में सत्याग्रह कर रहे थे। हालांकि, वहां डूरंड कप फुटबॉल टूर्नामेंट के आयोजन और प्रशासनिक अनुमति नहीं मिलने के कारण आंदोलन का स्थान बदल दिया गया है।
बुधवार से यह आंदोलन जयपाल सिंह स्टेडियम के समीप जारी रहेगा। यहां छात्रों के लिए टेंट की व्यवस्था की गई है ताकि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपना सत्याग्रह जारी रख सकें। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि स्थान बदलने से उनकी मांगों या आंदोलन की रणनीति में कोई बदलाव नहीं होगा।

आज निकलेगा संविधान मार्च
जेपीएससी जेएसएससी भर्ती धांधली के विरोध में आज दोपहर तीन बजे जयपाल सिंह स्टेडियम परिसर से संविधान मार्च निकाला जाएगा। छात्र यहां से पैदल मार्च करते हुए अलबर्ट एक्का चौक पहुंचेंगे।
मार्च के दौरान भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया जाएगा और राज्य सरकार से निष्पक्ष जांच एवं न्याय की मांग की जाएगी। आंदोलनकारी इसे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का प्रयास बता रहे हैं।

क्यों शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन?
पिछले कुछ समय से जेपीएससी और जेएसएससी की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों के बीच असंतोष देखा जा रहा है। कई छात्र संगठनों ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगाए हैं।
इन्हीं आरोपों को लेकर छात्रों ने सत्याग्रह शुरू किया और मांग की कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी, विशेष रूप से सीबीआई, से कराई जाए। आंदोलनकारी मानते हैं कि निष्पक्ष जांच से भर्ती प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का समाधान हो सकेगा।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि पिछले चार दिनों से छात्र लगातार सत्याग्रह पर बैठे हुए हैं, लेकिन राज्य सरकार के किसी मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी ने अब तक आंदोलन पर संज्ञान नहीं लिया है।
उन्होंने कहा कि संविधान मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और इसका उद्देश्य सरकार का ध्यान छात्रों की मांगों की ओर आकर्षित करना है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
जेएलकेएम ने दिया समर्थन
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) ने भी छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की है। धनबाद के तोपचांची में हुई केंद्रीय समिति की बैठक में पार्टी अध्यक्ष एवं डुमरी विधायक जयराम महतो ने कहा कि पार्टी संविधान पदयात्रा में सक्रिय रूप से भाग लेगी।
उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी रांची पहुंचेंगे। साथ ही आगामी विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान भी भर्ती से जुड़े मुद्दों को लेकर व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा।
भर्ती प्रक्रिया और युवाओं पर असर
जेपीएससी जेएसएससी भर्ती धांधली को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन का असर राज्य के हजारों प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है। छात्र चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष हो ताकि योग्य उम्मीदवारों को समान अवसर मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और समयबद्ध निर्णय युवाओं का विश्वास मजबूत करने के लिए आवश्यक है। वहीं सरकार और संबंधित आयोगों के साथ संवाद भी इस विवाद के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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छात्रों के लिए जरूरी सूचना
संविधान मार्च में शामिल होने वाले छात्रों से शांतिपूर्ण और कानून व्यवस्था का पालन करने की अपील की गई है। आंदोलनकारी संगठनों ने सभी प्रतिभागियों से अनुशासन बनाए रखने और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने का आग्रह किया है।
इसके साथ ही अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल संबंधित आयोगों की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और किसी भी अपुष्ट खबर या सोशल मीडिया अफवाह से बचें।
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