Bulandshahr Bank Scam: बंद पड़े 96 खातों से 53 लाख की निकासी, चार कर्मचारी सस्पेंड

NEWS SAGA DESK

Bulandshahr Bank Scam में जिला सहकारी बैंक के 96 निष्क्रिय खातों से 53 लाख रुपये से अधिक की निकासी का खुलासा हुआ। चार कर्मचारी सस्पेंड, एफआईआर की तैयारी

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में जिला सहकारी बैंक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया है कि बैंक के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने वर्षों से निष्क्रिय पड़े 96 बैंक खातों से फर्जी तरीके से 53 लाख रुपये से अधिक की निकासी कर ली। मामले के सामने आने के बाद बैंक प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चार अधिकारी-कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है, जबकि अन्य संदिग्ध कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

बुलंदशहर में जिला सहकारी बैंक की कार्यप्रणाली

यह मामला बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की अहमियत को एक बार फिर उजागर करता है। बैंक प्रबंधन ने प्रभावित खाताधारकों को पूरा पैसा लौटाने का भरोसा भी दिया है।

Bulandshahr Bank Scam का खुलासा एक साधारण शिकायत से शुरू हुआ। एक खाताधारक के परिजन बैंक में पासबुक अपडेट कराने पहुंचे। बैंक रिकॉर्ड देखने पर पता चला कि खाते से पहले ही करीब 1.10 लाख रुपये निकाले जा चुके थे, जबकि खाताधारक का कई वर्ष पहले निधन हो चुका था।

इस घटना के बाद बैंक प्रबंधन ने पूरे मामले की जांच शुरू कराई। जांच के दौरान पता चला कि केवल एक ही नहीं, बल्कि 96 निष्क्रिय खातों से भी करोड़ों नहीं, बल्कि 53 लाख रुपये से अधिक की हेराफेरी की गई थी। इसके बाद मामला गंभीर आर्थिक अनियमितता के रूप में सामने आया।

फर्जी KYC बनाकर निकाली गई रकम

जांच रिपोर्ट के अनुसार, जिन खातों में लंबे समय से कोई लेन-देन नहीं हो रहा था, उन्हें निशाना बनाया गया। आरोप है कि बैंक कर्मचारियों ने फर्जी KYC दस्तावेज तैयार कर खातों को सक्रिय दिखाया और फिर उनमें जमा राशि निकाल ली।

कुछ रकम अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर की गई, जबकि कुछ राशि नकद निकाली गई। जांच में ऊंचागांव शाखा से भी इसी तरह की अनियमितताओं के संकेत मिले हैं, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि मामला केवल एक शाखा तक सीमित नहीं हो सकता।

बुलंदशहर में जिला सहकारी बैंक की कार्यप्रणाली

चार कर्मचारी सस्पेंड, आगे होगी सख्त कार्रवाई

Bulandshahr Bank Scam की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद बैंक प्रशासन ने चार अधिकारी-कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके अलावा दो अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

बैंक अधिकारियों ने बताया कि संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

प्रबंधन का कहना है कि यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।

पीड़ित खाताधारकों को मिलेगा पूरा पैसा

बैंक प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन ग्राहकों के खातों से अवैध तरीके से पैसे निकाले गए हैं, उन्हें पूरी राशि वापस की जाएगी। इसके लिए प्रभावित खातों का सत्यापन किया जा रहा है। साथ ही, जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता साबित होगी, उनसे नियमों के अनुसार राशि की वसूली की जाएगी। बैंक ने भरोसा दिलाया है कि ग्राहकों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक निष्क्रिय रहने वाले खातों पर यदि नियमित निगरानी न हो तो वे धोखाधड़ी का आसान माध्यम बन सकते हैं। ऐसे खातों में खाताधारक या उनके परिजन अक्सर लेन-देन नहीं करते, जिससे अनियमितताओं का लंबे समय तक पता नहीं चल पाता। इसी कारण बैंक समय-समय पर KYC अपडेट कराने और निष्क्रिय खातों की निगरानी की प्रक्रिया अपनाते हैं। इस मामले ने आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था और ऑडिट प्रणाली को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी सवाल खड़े किए हैं।

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बैंक प्रबंधन ने कहा है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। प्रभावित ग्राहकों को उनकी पूरी राशि लौटाई जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों से वसूली की जाएगी। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए बैंक की आंतरिक निगरानी प्रणाली को और सख्त बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। यदि आपका बैंक खाता लंबे समय से निष्क्रिय है, तो समय-समय पर पासबुक अपडेट कराएं या बैंक स्टेटमेंट की जांच करें। KYC विवरण सही रखें और किसी भी संदिग्ध लेन-देन की जानकारी तुरंत संबंधित बैंक शाखा को दें। नियमित निगरानी से ऐसी धोखाधड़ी की घटनाओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है।

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