JSSC CGL के 1932 चयनित कर्मियों की नौकरी बहाल हो गई है, लेकिन वेतन भुगतान अटका है। 15 सितंबर की सुनवाई और CID जांच पर सबकी नजर।
JSSC CGL के जरिए नियुक्त झारखंड के 1932 चयनित कर्मियों को नौकरी बहाल होने के बाद भी राहत पूरी तरह नहीं मिली है। नियुक्ति रद्द किए जाने के सरकारी फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद कर्मचारियों ने दोबारा अपने पद पर योगदान तो दे दिया, लेकिन अब वेतन भुगतान को लेकर नया पेंच सामने आ गया है। कई कर्मियों का कहना है कि संबंधित विभागों में वेतन भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए कार्मिक विभाग की ओर से स्पष्ट आदेश का इंतजार किया जा रहा है।

मामला JSSC CGL के माध्यम से विभिन्न सरकारी पदों पर हुई नियुक्तियों से जुड़ा है। इनमें प्रशाखा पदाधिकारी, कनीय सचिवालय सहायक, सर्किल इंस्पेक्टर, ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर, ब्लॉक वेलफेयर ऑफिसर और लेबर एनफोर्समेंट ऑफिसर समेत कई पद शामिल हैं।
पहले नियुक्ति रद्द हुई, फिर कोर्ट से मिली राहत
JSSC CGL चयनित अभ्यर्थियों की मुश्किलें 17 अगस्त 2026 को बढ़ गयी थीं। राज्य सरकार की विशेष कैबिनेट बैठक में इन नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया गया। इसके बाद करीब 1932 चयनित कर्मियों के सामने नौकरी जाने का संकट खड़ा हो गया।
मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा। 20 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने सरकार के नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया यह माना कि नियुक्तियां रद्द करने से पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया।
कोर्ट के आदेश के बाद 23 अगस्त से कर्मचारियों के दोबारा अपने पद पर योगदान देने का रास्ता साफ हुआ। चयनित कर्मियों ने संबंधित कार्यालयों में योगदान भी किया। हालांकि, इसके बाद वेतन भुगतान को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया में नया सवाल खड़ा हो गया।पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल नियुक्ति रद्द किए जाने और सेवा समाप्त किए जाने के अंतर को लेकर है। कर्मचारियों का दावा है कि कार्मिक विभाग की ओर से उनकी सेवा समाप्त करने का अलग आदेश नहीं दिया गया था, बल्कि सरकार ने नियुक्ति रद्द करने का फैसला लिया था।
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अब हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद जब कर्मचारियों ने दोबारा योगदान दिया है, तब प्रशासनिक स्तर पर यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि उनकी री-ज्वाइनिंग किस आदेश और किस प्रक्रिया के तहत दर्ज की जाए।
कर्मियों का कहना है कि कार्मिक विभाग की ओर से स्पष्ट आदेश जारी होने के बाद ही वेतन भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह आगे बढ़ सकेगी। इसी कारण अब उनकी नजर विभागीय आदेश पर टिकी है।
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