सरेंडर करने वाले नक्सली शनिचरा ने रिम्स में इलाज के दौरान तोड़ा दम

NEWS SAGA DESK

झारखंड में 28 जुलाई को हथियार डालने वाले नक्सली शनिचरा की रिम्स में इलाज के दौरान मौत हो गई। तबीयत बिगड़ने पर उसे हजारीबाग ओपन जेल से रांची लाया गया था।

रांची: झारखंड में हाल ही में हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले नक्सली शनिचरा की रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में इलाज के दौरान मौत हो गई। आत्मसमर्पण के बाद शनिचरा को हजारीबाग स्थित ओपन जेल में रखा गया था। वहीं रहने के दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद बेहतर इलाज के लिए उसे रांची लाया गया। रिम्स में डॉक्टरों की निगरानी में उपचार के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

नक्सली शनिचरा की रिम्स में इलाज के दौरान मौत

शनिचरा ने महज कुछ दिन पहले ही हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन में लौटने का फैसला किया था। नक्सली शनिचरा ने 28 जुलाई को झारखंड पुलिस मुख्यालय में आयोजित आत्मसमर्पण कार्यक्रम में अपने 16 अन्य साथियों के साथ पुलिस के समक्ष हथियार डाल दिए थे।

28 जुलाई को किया था आत्मसमर्पण

जानकारी के अनुसार, 28 जुलाई को झारखंड पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान शनिचरा समेत कुल 17 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। सभी ने पुलिस के समक्ष हथियार छोड़कर हिंसा का रास्ता त्यागने और समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया था।

आत्मसमर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तय प्रक्रिया के तहत शनिचरा और उसके अन्य साथियों को हजारीबाग स्थित ओपन जेल भेजा गया था। वहां सरेंडर करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास और सामान्य जीवन में वापसी की प्रक्रिया के तहत उन्हें रखा गया था।

ओपन जेल में रहने के दौरान शनिचरा की तबीयत अचानक खराब हो गई। उसकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने उसे बेहतर इलाज के लिए रांची लाने का फैसला किया। इसके बाद उसे राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान यानी रिम्स में भर्ती कराया गया।

रिम्स में चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज शुरू किया गया। हालांकि, उपचार के दौरान उसकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।

मुख्यधारा में लौटने के कुछ दिन बाद मौत

शनिचरा की मौत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसने कुछ ही दिन पहले नक्सली गतिविधियों से अलग होकर सामान्य जीवन जीने का निर्णय लिया था। आत्मसमर्पण के बाद उसके लिए नई जिंदगी की शुरुआत हुई थी, लेकिन मुख्यधारा में वापसी के कुछ ही समय बाद उसकी मौत हो गई।

नक्सली सरेंडर के बाद सरेंडर करने वालों को सरकार की निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुनर्वास और सामाजिक जीवन में लौटने का अवसर दिया जाता है। शनिचरा भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा था।

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