News Saga Desk
आज से भारतीय संसद का विशेष सत्र शुरू हो गया है, जिसमें केंद्र सरकार महिला सशक्तिकरण और चुनावी ढांचे में बड़े बदलाव से जुड़े अहम विधेयक पेश करने जा रही है। इस सत्र का केंद्र बिंदु नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला आरक्षण बिल में संशोधन और परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव हैं। सत्र को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ सक्रिय हो गए हैं।
सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह विशेष बैठक देश में नारी सशक्तिकरण के लिए एक बड़ा कदम साबित होगी। उन्होंने कहा, “माताओं-बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है और इसी भावना के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ऋग्वेद का एक श्लोक साझा करते हुए नारी शक्ति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने लिखा कि नारी अपने ज्ञान के प्रकाश से अज्ञान के अंधकार को दूर कर पूरे विश्व को आलोकित करती है, इसलिए उसका सम्मान सर्वोपरि है।
इस विधेयक के तहत लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इसमें 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। इसके जरिए 2029 के आम चुनाव से पहले ही 33% महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता साफ करने की कोशिश है।
इन प्रस्तावों को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इस पूरे मुद्दे पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पार्टी के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि केंद्र सरकार को पहले जाति जनगणना करानी चाहिए, उसके बाद ही इस तरह के संवैधानिक संशोधन लाने चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक “बड़ी राजनीतिक साजिश” है, जिसे संवैधानिक रूप देने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि प्रस्तावित परिसीमन से झारखंड और दक्षिण भारत के छोटे राज्यों को नुकसान हो सकता है। सुप्रियो भट्टाचार्य ने एन. चंद्रबाबू नायडू से भी अपील की कि यदि उनके राज्य को नुकसान की आशंका है, तो उन्हें केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेने पर विचार करना चाहिए।
यह विशेष सत्र केवल महिला आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के चुनावी ढांचे में बड़े बदलाव की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। एक तरफ सरकार इसे नारी सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक संतुलन और राज्यों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रहा है। अब सभी की नजरें संसद की कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां इन विधेयकों पर तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।
संसद की कार्यवाई के दौरान सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने महिला आरक्षण विधेयक में मुस्लिम महिलाओं के लिए कोटा शामिल करने की मांग की, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया. शाह ने स्पष्ट किया कि संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता है. शाह ने कहा कि सपा अगर चाहे तो अपनी मुस्लिम महिला उम्मीदवारों को टिकट दे सकती है.
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