लखनऊ के अलीगंज में 15 लोगों की मौत वाले अग्निकांड के बाद LDA ने अवैध घोषित इमारत को गिराना शुरू किया। भवन मालिक ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट जाने की बात कही।
लखनऊ अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद आखिरकार प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। शनिवार सुबह लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने अलीगंज स्थित उस चार मंजिला इमारत को ध्वस्त करना शुरू किया, जिसे जांच के बाद अवैध निर्माण और नियमों के विपरीत उपयोग किए जाने का दोषी पाया गया था। भारी पुलिस बल, बुलडोजर और हाइड्रोलिक मशीनों की मौजूदगी में यह कार्रवाई की जा रही है। वहीं, भवन मालिक ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे अदालत में चुनौती देने की बात कही है।

भारी सुरक्षा के बीच चला ध्वस्तीकरण अभियान
लखनऊ अग्निकांड से जुड़ी इस इमारत को गिराने के लिए एलडीए की टीम सुबह मौके पर पहुंची। कार्रवाई में तीन बुलडोजर, एक हाइड्रोलिक मशीन और कई अधिकारी शामिल रहे। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए आसपास की सड़कों पर बैरिकेडिंग कर आवाजाही रोक दी गई और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।
प्रशासन का अनुमान है कि पूरी इमारत को ध्वस्त करने में पूरा दिन लग सकता है। मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।
जांच में सामने आया अवैध निर्माण का मामला
एलडीए की जांच में सामने आया कि जिस इमारत में लखनऊ अग्निकांड हुआ, उसका उपयोग स्वीकृत मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार यह भवन मूल रूप से रिहायशी था, लेकिन इसका इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
जांच के बाद भवन स्वामी को नोटिस जारी कर निर्धारित समय के भीतर स्वयं भवन हटाने का निर्देश दिया गया था। समय सीमा पूरी होने के बाद एलडीए ने अपने स्तर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी।
भवन मालिक ने उठाए कानूनी सवाल
ध्वस्तीकरण के दौरान भवन मालिक की ओर से पहुंचे अधिवक्ता ने प्रशासन की कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि भवन हटाने के लिए 25 जुलाई तक का समय दिया गया था, लेकिन उसी दिन कार्रवाई शुरू कर दी गई।
वकील का यह भी दावा है कि अलग से ध्वस्तीकरण का आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया और केवल नोटिस के आधार पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है और प्रशासन की कार्रवाई की वैधता पर न्यायालय में सुनवाई की मांग की जाएगी।
22 जून को हुई थी दर्दनाक घटना
22 जून को अलीगंज स्थित इसी चार मंजिला इमारत में भीषण आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई थी। आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोग अपनी जान बचाने के लिए इमारत से कूदने को मजबूर हो गए। कुछ लोगों ने पाइप और बिजली के तारों के सहारे नीचे उतरकर अपनी जान बचाई।
इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया था और भवन सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
हादसे के बाद शुरू हुई जांच
लखनऊ अग्निकांड के बाद प्रशासन ने इमारत की निर्माण अनुमति, उपयोग और सुरक्षा मानकों की जांच कराई। जांच में कई अनियमितताएं सामने आने के बाद भवन को अवैध घोषित किया गया। इसके बाद एलडीए ने नोटिस जारी कर भवन हटाने की प्रक्रिया शुरू की।
घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबंधित विभागों के चार अधिकारियों को निलंबित किया था। इसके अलावा चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया।
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सुरक्षा नियमों पर बढ़ी सख्ती
इस कार्रवाई के बाद शहर में अवैध निर्माण और भवनों के व्यावसायिक उपयोग को लेकर प्रशासन की सख्ती बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि भवन सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और समय पर कार्रवाई आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
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