झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन की खबर से पूरे राज्य में शोक की लहर है। उनके निधन ने परिवार, करीबी सहयोगियों और समर्थकों को गहरे सदमे में डाल दिया है। वहीं, राजनीतिक जगत में भी शोक का माहौल है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेताओं ने उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
NEWS SAGA DESK:
झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन की खबर से पूरे राज्य में शोक की लहर है। उनके निधन ने परिवार, करीबी सहयोगियों और समर्थकों को गहरे सदमे में डाल दिया है। वहीं, राजनीतिक जगत में भी शोक का माहौल है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेताओं ने उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
JMM ने बताया अपूरणीय क्षति
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की। पार्टी ने कहा कि उनका जाना संगठन, सरकार और पूरे झारखंड के लिए बेहद बड़ी क्षति है। पार्टी ने उनके संघर्ष, जनसेवा और संगठन के प्रति समर्पण को याद करते हुए कहा कि उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा। संदेश के अंत में पार्टी की ओर से उन्हें ‘अंतिम जोहार’ कहा गया।

जोबा मांझी ने जताया गहरा दुख
सुदिव्य सोनू के निधन पर पूर्व मुख्यमंत्री जोबा मांझी ने भी गहरा दुख प्रकट किया। उन्होंने कहा कि अचानक उनके निधन की खबर बेहद पीड़ादायक और स्तब्ध करने वाली है। बताया गया कि देर रात तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। जोबा मांझी ने दिवंगत नेता के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए ईश्वर से उन्हें इस कठिन समय में हिम्मत देने की प्रार्थना की।
दीपक बिरुआ ने कहा- मन मर्माहत
मंत्री दीपक बिरुआ ने भी सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एक साथी और करीबी सहयोगी के असमय चले जाने से उनका मन बेहद दुखी है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की। अपने भावुक संदेश के अंत में उन्होंने लिखा— ‘अश्रुपूर्ण और अंतिम जोहार भाई।’

JMM में शोक का माहौल
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद झामुमो संगठन और सरकार से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक का माहौल है। पार्टी के नेताओं ने उनके राजनीतिक सफर, संगठन के प्रति समर्पण और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को याद किया। उनके असमय निधन को झारखंड की राजनीति और पार्टी संगठन के लिए एक बड़ी क्षति के तौर पर देखा जा रहा है।
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