यूपी में बाढ़ से विकराल स्थिति, 35 जिलों में अलर्ट जारी

NEWS SAGA DESK

यूपी में गंगा-यमुना समेत कई नदियां उफान पर हैं, जिससे 35 जिलों में बाढ़ का संकट गहरा गया है। राहत और बचाव कार्य में जुटी प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।

उत्तर प्रदेश में मानसून की भारी बारिश और प्रमुख नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण यूपी में बाढ़ से विकराल स्थिति बनी हुई है। राज्य के करीब 35 जिले बाढ़ के पानी और कटान की चपेट में हैं। गंगा, यमुना, चंबल और मंडाकिनी जैसी प्रमुख नदियां खतरे के निशान के आसपास और कई स्थानों पर उफान पर बह रही हैं। खासकर पूर्वांचल और तराई के इलाकों में ग्रामीण बस्तियां पानी से घिर गई हैं, जिससे लाखों लोगों का सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। प्रशासन की ओर से राहत व बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं।

उत्तर प्रदेश में मानसून की

गंगा और यमुना नदी के उफान से तटवर्ती जिलों में बढ़ा संकट

पूर्वांचल के वाराणसी, प्रयागराज, गाजीपुर और बलिया जैसे जिलों में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से ऊपर चढ़ रहा है। वहीं यमुना नदी और मध्य प्रदेश की ओर से आ रहे अतिरिक्त पानी के कारण चित्रकूट और आसपास के क्षेत्रों में मंडाकिनी नदी का जलस्तर भी काफी बढ़ गया है। प्रयागराज और वाराणसी में नदी तट के निचले बस्तियों में पानी घुस जाने से दर्जनों बस्तियों का संपर्क मुख्य सड़कों से टूट गया है। तटीय इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों और उच्च भूमि पर जाने के लिए कहा गया है।

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16,700 से अधिक लोगों का रेस्क्यू और राहत शिविरों का संचालन

राज्य सरकार और राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। प्रभावित जिलों में बाढ़ शरणालयों (राहत शिविरों) को सक्रिय कर दिया गया है, जहां लोगों के लिए भोजन, शुद्ध पेयजल, दवाइयां और प्रकाश की व्यवस्था की जा रही है। एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और पीएसी की फ्लड कंपनियों के साथ-साथ करीब 1,499 से अधिक नावों और मोटरबोटों को राहत व बचाव अभियान में तैनात किया गया है।

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