Monsoon Update 2026: झारखंड-बिहार में क्यों लेट हुआ मानसून? जानिए कब होगी जोरदार बारिश

Monsoon Update 2026: झारखंड, बिहार और उत्तर भारत के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। जानिए देरी की वजह, मौसम विभाग का ताजा पूर्वानुमान और कब होगी बारिश।

News Saga Desk

देश के कई राज्यों में लोग मानसून की बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जून का अंतिम सप्ताह शुरू हो चुका है, लेकिन झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और उत्तर भारत के कई हिस्सों में अब तक मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इस बार मानसून की रफ्तार धीमी क्यों पड़ गई है और बारिश कब तक इन क्षेत्रों में पहुंचेगी।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष मानसून की प्रगति सामान्य वर्षों की तुलना में कुछ धीमी रही है। हालांकि यह पूरी तरह असामान्य स्थिति नहीं है, लेकिन मानसून के आगे बढ़ने में कुछ महत्वपूर्ण मौसमीय कारण बाधा बन रहे हैं। यही वजह है कि कई राज्यों में किसानों, आम लोगों और प्रशासन की नजरें मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर टिकी हुई हैं।

Monsoon Update 2026

सामान्य से पीछे चल रहा है मानसून

आमतौर पर जून के अंतिम सप्ताह तक दक्षिण गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कई क्षेत्रों में मानसून पहुंच जाता है। लेकिन इस साल Monsoon Update के अनुसार इन इलाकों में मानसून की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून को आगे बढ़ाने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां अभी तक पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाई हैं। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में मजबूत निम्न दबाव क्षेत्र तथा चक्रवाती परिसंचरण का अभाव मानसून की गति को प्रभावित कर रहा है।

क्यों धीमी पड़ गई मानसून की चाल?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की प्रगति मुख्य रूप से समुद्री क्षेत्रों में बनने वाली मौसम प्रणालियों पर निर्भर करती है। जब बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है, तब वह मानसूनी हवाओं को अधिक सक्रिय बनाता है और उन्हें आगे बढ़ने में मदद करता है।

इस वर्ष अब तक ऐसे मजबूत सिस्टम कम विकसित हुए हैं। परिणामस्वरूप मानसून को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाई और इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई। यही कारण है कि झारखंड, बिहार और उत्तर भारत के कई हिस्सों में अपेक्षित समय तक मानसून नहीं पहुंच पाया।

पश्चिमी तट पर अच्छी बारिश

हालांकि देश के पश्चिमी तटीय इलाकों के लिए राहत की खबर है। अरब सागर से लगातार नमी मिलने के कारण कोंकण, गोवा, तटीय कर्नाटक और मुंबई समेत कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की जा रही है।

इन इलाकों में मानसून सक्रिय हो चुका है और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी लगातार बारिश की संभावना जताई है। इससे जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ रहा है और गर्मी से भी राहत मिली है।

पूर्वी भारत के लिए उम्मीद की किरण

Weather Forecast के अनुसार 28 जून के आसपास उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक चक्रवाती परिसंचरण विकसित हो सकता है। इसके प्रभाव से निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, जो मानसून को नई ऊर्जा प्रदान कर सकता है।

यदि यह सिस्टम मजबूत होता है तो 28 से 30 जून के बीच बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई हिस्सों में मानसून तेजी से आगे बढ़ सकता है। मौसम विभाग का मानना है कि इसके बाद इन क्षेत्रों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।

कम बारिश से बढ़ी किसानों की चिंता

मानसून की देरी का असर कृषि क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। खरीफ फसलों की बुवाई का समय शुरू हो चुका है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण कई इलाकों में किसान बुवाई का कार्य शुरू नहीं कर पाए हैं।

आंकड़ों के अनुसार 21 जून तक देशभर में सामान्य से लगभग 42 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई थी। यह कमी कृषि उत्पादन और जल संसाधनों दोनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जुलाई के पहले सप्ताह से अच्छी बारिश शुरू हो जाती है तो स्थिति में काफी सुधार आ सकता है और बारिश की कमी की कुछ हद तक भरपाई संभव होगी।

जुलाई पर टिकी सबकी नजर

फिलहाल देशभर के किसानों, मौसम वैज्ञानिकों और आम लोगों की नजर जुलाई के मौसम पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी में बनने वाला संभावित सिस्टम मानसून की दिशा और गति तय करेगा।

यदि मौसम विभाग का अनुमान सही साबित होता है तो झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और उत्तर भारत के कई हिस्सों में जल्द ही अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। इससे न केवल लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी बल्कि कृषि गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

Monsoon Update 2026 के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आने वाले एक सप्ताह का मौसम पूरे मानसून सीजन की तस्वीर बदल सकता है। इसलिए मौसम विभाग की चेतावनियों और पूर्वानुमानों पर लगातार नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

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