Samvidhan Hatya Diwas 2026: पटना में सम्राट चौधरी और जेपी नड्डा ने आपातकाल को बताया लोकतंत्र का काला अध्याय

Samvidhan Hatya Diwas पर पटना में आयोजित कार्यक्रम में सम्राट चौधरी और जेपी नड्डा ने आपातकाल को लोकतंत्र का काला अध्याय बताते हुए संविधान की रक्षा का आह्वान किया।

News Saga Desk

पटना। 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की स्मृति में आयोजित Samvidhan Hatya Diwas कार्यक्रम में बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के साथ भाग लिया। पटना में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, लोकतंत्र सेनानी और आम नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय बताते हुए संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प दोहराया।

Samvidhan Hatya Diwas के अवसर पर सम्राट चौधरी ने कहा कि 25 जून 1975 का दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ऐसी घटना के रूप में दर्ज है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि उस समय देश में नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर गंभीर प्रहार किया गया था।

Samvidhan Hatya Diwas पर लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के दौरान उन लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। सम्राट चौधरी ने कहा कि हजारों लोगों ने जेल की यातनाएं झेलीं, लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों से समझौता नहीं किया।

उन्होंने कहा कि देश के लोकतंत्र को मजबूत बनाने में उन सेनानियों का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। Samvidhan Hatya Diwas केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वालों के प्रति सम्मान प्रकट करने का अवसर भी है।

क्या था 1975 का आपातकाल?

भारत में 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया था। यह आपातकाल लगभग 21 महीने तक लागू रहा। इस दौरान कई विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई नागरिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए।

राजनीतिक इतिहासकारों के अनुसार, आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के सबसे विवादित दौरों में से एक माना जाता है। इसी पृष्ठभूमि को याद करते हुए हर वर्ष Samvidhan Hatya Diwas के माध्यम से लोकतंत्र और संविधान की महत्ता पर चर्चा की जाती है।

Samvidhan Hatya Diwas

जेपी नड्डा ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर दिया जोर

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने भी लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती संविधान और जनता की जागरूकता पर निर्भर करती है। उन्होंने आपातकाल के दौरान हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों की रक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

उन्होंने युवाओं से इतिहास को जानने और लोकतंत्र की रक्षा के लिए जागरूक रहने का आह्वान किया। Samvidhan Hatya Diwas का संदेश यही है कि देश में लोकतांत्रिक परंपराएं सदैव मजबूत बनी रहें।

संविधान की गरिमा बनाए रखने का संकल्प

सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का संविधान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और लोकतंत्र को मजबूत बनाता है।

उन्होंने उपस्थित लोगों से संविधान की गरिमा बनाए रखने, लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करने और देशहित में कार्य करने का संकल्प लेने का आग्रह किया। उनके अनुसार, लोकतंत्र तभी मजबूत रहेगा जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक रहेंगे।

Samvidhan Hatya Diwas

युवाओं के लिए क्या संदेश?

कार्यक्रम में विशेष रूप से युवाओं को लोकतंत्र के इतिहास से परिचित कराने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि नई पीढ़ी को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कितनी महत्वपूर्ण है और इसे बनाए रखने के लिए पूर्व पीढ़ियों ने कितना संघर्ष किया है।

Samvidhan Hatya Diwas का उद्देश्य केवल अतीत की घटनाओं को याद करना नहीं है, बल्कि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों को लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूक बनाना भी है।

लोकतंत्र की रक्षा का आह्वान

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने संविधान की रक्षा, लोकतंत्र की मजबूती और भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं को अक्षुण्ण बनाए रखने का संकल्प लिया। नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र भारत की सबसे बड़ी शक्ति है और इसकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

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Samvidhan Hatya Diwas के अवसर पर दिया गया यह संदेश लोकतंत्र, संविधान और नागरिक स्वतंत्रताओं के महत्व को एक बार फिर रेखांकित करता है। कार्यक्रम ने लोगों को लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूक रहने और संविधान की गरिमा बनाए रखने की प्रेरणा दी।

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