हड़ताल से कोयलांचल में ठप हुआ उत्पादन और डिस्पैच, परिवहन व्यवस्था पर भी असर; यूनियनों ने नए कानूनों को बताया मजदूर विरोधी

News Saga Desk

धनबाद। केंद्र सरकार के प्रस्तावित नई श्रम संहिताओं और सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल का सबसे ज्यादा असर कोयलांचल में देखा गया। भारतीय मजदूर संघ को छोड़कर सभी प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने हड़ताल में हिस्सा लिया। धनबाद, झरिया, कतरास, निरसा और बाघमारा की कोयला परियोजनाओं में काम पूरी तरह रुक गया। कोयले का उत्पादन और डिस्पैच दोनों बंद रहे। रेलवे साइडिंग पर सन्नाटा छाया रहा। परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हुई।

श्रमिकों से समर्थन मांगा और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की

सुबह से ही यूनियन नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। वे कोल परियोजनाओं, ओबी साइटों और डिस्पैच केंद्रों पर पहुंचे। उन्होंने श्रमिकों से समर्थन मांगा और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

बिहार कोलियरी कामगार यूनियन, बस्ताकोला के अध्यक्ष राजेंद्र पासवान ने हड़ताल को सफल बताया। उन्होंने कहा कि यह हड़ताल मजदूरों, किसानों और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए है। उनका कहना है कि श्रम कानूनों में किए गए बदलाव मजदूर विरोधी हैं।

कोयले का उत्पादन और डिस्पैच दोनों बंद रहे।

कोयले का उत्पादन और डिस्पैच दोनों बंद रहे।

नया लेबर कोड मजदूरों के हितों के खिलाफ: प्रदर्शनकारी

यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर जनविरोधी कानून वापस नहीं लिए गए तो आंदोलन सड़क से संसद तक जारी रहेगा। उनका आरोप है कि नया लेबर कोड मजदूरों के हितों के खिलाफ है। इससे श्रमिकों के अधिकारों में कटौती होगी और निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

हड़ताल से कंपनियों को करोड़ों रुपए के नुकसान की आशंका है। इसका असर उद्योगों के साथ-साथ परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ा है।


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