रांची नगर निगम मानदेय पर बड़ा अपडेट। मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों को पुराने मानदेय के आधार पर भुगतान होगा। चार माह का बकाया अगले सप्ताह जारी होगा।
रांची नगर निगम मानदेय को लेकर बड़ा फैसला
रांची नगर निगम मानदेय को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। नगर विकास विभाग ने फिलहाल मानदेय में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं लिया है। ऐसे में चुने हुए जनप्रतिनिधियों को आठ वर्ष पहले निर्धारित दरों के अनुसार ही भुगतान किया जाएगा। इसके तहत मेयर को प्रति माह 10 हजार रुपये, डिप्टी मेयर को 9 हजार रुपये और पार्षदों को 7 हजार रुपये मानदेय मिलेगा। रांची नगर निगम ने बताया है कि चार माह का बकाया मानदेय अगले सप्ताह एक साथ जारी किया जाएगा।

आठ साल पुरानी दरों पर मिलेगा भुगतान
नगर विकास विभाग ने अभी तक मानदेय बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है। इसी कारण रांची नगर निगम मानदेय पुराने ढांचे के अनुसार ही दिया जाएगा।
मौजूदा व्यवस्था में मेयर को 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय के साथ वाहन एवं अन्य भत्तों के रूप में अलग राशि मिलती है। वहीं डिप्टी मेयर और पार्षदों को भी निर्धारित पुरानी दरों के अनुसार भुगतान किया जाएगा। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि वर्तमान जिम्मेदारियों और बढ़ती महंगाई को देखते हुए यह राशि पर्याप्त नहीं है।
दूसरे राज्यों की तुलना में झारखंड पीछे
रांची नगर निगम मानदेय की तुलना यदि पड़ोसी और अन्य राज्यों से की जाए तो झारखंड के जनप्रतिनिधियों को अपेक्षाकृत कम राशि मिलती है।
बिहार में मेयर को लगभग 40 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय के साथ अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। डिप्टी मेयर और पार्षदों को भी झारखंड की तुलना में अधिक भुगतान मिलता है। हरियाणा में मेयर को मानदेय के अलावा वाहन और चालक की सुविधा दी जाती है, जबकि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी नगर निकाय प्रतिनिधियों को अपेक्षाकृत अधिक आर्थिक सहायता और भत्ते मिलते हैं।
इसी कारण झारखंड के कई जनप्रतिनिधियों ने मानदेय में संशोधन की मांग उठाई है।
चार माह से बिना मानदेय कर रहे हैं काम
रांची नगर निगम के नव-निर्वाचित मेयर, डिप्टी मेयर और 53 वार्डों के पार्षद चुनाव परिणाम घोषित होने के करीब चार माह बाद भी बिना मानदेय के अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
नगर निगम ने मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव विभाग को भेजा था, लेकिन अंतिम निर्णय नहीं होने के कारण भुगतान रुका रहा। अब विभाग की स्वीकृति मिलने के बाद पुराने मानदेय के आधार पर चार माह की राशि एक साथ जारी की जाएगी। नगर निकायों के चुने हुए प्रतिनिधि अपने-अपने वार्डों में विकास कार्यों की निगरानी, नागरिक समस्याओं का समाधान, योजनाओं का निरीक्षण और विभिन्न बैठकों में भागीदारी जैसी जिम्मेदारियां निभाते हैं।
इन कार्यों के लिए उन्हें नियमित क्षेत्र भ्रमण करना पड़ता है, जिसके लिए परिवहन, संचार और अन्य खर्च भी होते हैं। ऐसे में पर्याप्त मानदेय को जनप्रतिनिधियों के प्रभावी कार्य निष्पादन से जोड़कर देखा जाता है।
जनप्रतिनिधियों और जनता पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर मानदेय मिलने से जनप्रतिनिधियों का मनोबल बढ़ेगा और वे अपने वार्डों में अधिक सक्रियता से कार्य कर सकेंगे। नियमित क्षेत्र भ्रमण से सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और सफाई जैसी स्थानीय समस्याओं की जानकारी समय पर मिल सकेगी।
वहीं यदि भविष्य में मानदेय में बढ़ोतरी होती है तो जनप्रतिनिधियों को अपने दायित्वों के निर्वहन में आर्थिक सहूलियत मिल सकती है। हालांकि वर्तमान में भुगतान पुरानी दरों पर ही किया जाएगा।
विभाग का क्या निर्णय है?
नगर विकास विभाग ने फिलहाल मानदेय बढ़ाने के प्रस्ताव पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। विभाग ने आठ वर्ष पहले निर्धारित मानदेय के अनुसार भुगतान की अनुमति दी है।
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रांची नगर निगम के अनुसार अगले सप्ताह मेयर, डिप्टी मेयर और सभी 53 वार्ड पार्षदों को चार माह का बकाया मानदेय एक साथ उनके खातों में जारी किया जाएगा। स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि नागरिकों और प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। सक्रिय जनप्रतिनिधि क्षेत्र की समस्याओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाने और उनके समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ऐसे में समय पर मानदेय मिलने से उनके नियमित क्षेत्रीय दौरे और जनसंपर्क गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि मानदेय बढ़ाने का अंतिम निर्णय राज्य सरकार और नगर विकास विभाग के स्तर पर ही लिया जाएगा।
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