रांची राशन कार्ड विवाद में भाजपा नेता अरुण कुमार झा को नोटिस जारी हुआ। प्रशासन ने अपात्र लाभ लेने पर कार्रवाई की चेतावनी दी, जबकि झा ने कार्ड सरेंडर करने का दावा किया।
क्या है पूरा मामला?
जिला प्रशासन के अनुसार, केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से अपात्र लाभुकों की पहचान के लिए विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है। इसी दौरान कई ऐसे राशन कार्डधारकों की पहचान की गई, जिनकी आय निर्धारित सीमा से अधिक होने के बावजूद वे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का लाभ लेने के पात्र नहीं थे।

प्रशासन की ओर से जारी सूची में हरमू क्षेत्र के पूर्व वार्ड पार्षद अरुण कुमार झा और उनकी पत्नी का नाम भी शामिल है। आरोप है कि दोनों के नाम पर राशन कार्ड जारी हुआ, जबकि वे पात्रता की निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करते थे। इसी आधार पर उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
जांच में क्या सामने आया?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रांची जिला प्रशासन की जांच में भारत सरकार के उपलब्ध डाटा और सीबीडीटी (CBDT) से प्राप्त आय संबंधी आंकड़ों का मिलान किया गया। जांच में कुल 8,875 ऐसे परिवारों की पहचान हुई, जिनकी वार्षिक आय छह लाख रुपये से अधिक बताई गई, लेकिन उनके नाम पर राशन कार्ड सक्रिय पाए गए।
प्रशासन का कहना है कि ऐसे मामलों में झारखंड लक्षित जन वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश-2024 के प्रावधान लागू होते हैं। यदि कोई व्यक्ति अपात्र होते हुए भी सरकारी लाभ लेता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
अरुण कुमार झा ने क्या कहा?
रांची राशन कार्ड विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए अरुण कुमार झा ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2023 में केवल दो यूनिट का राशन कार्ड बनवाया था। उनके अनुसार इसका उद्देश्य आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करना था, न कि सरकारी राशन लेना।
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कभी भी राशन की एक भी खेप नहीं उठाई। साथ ही यह भी कहा कि जब उन्हें नियमों की जानकारी हुई तो उन्होंने लगभग दो महीने पहले स्वयं संबंधित विभाग को लिखित आवेदन देकर राशन कार्ड सरेंडर कर दिया। उन्होंने प्रशासन के साथ सहयोग करने की भी बात कही।
प्रशासन का आधिकारिक रुख
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अपात्र लाभुकों के खिलाफ कार्रवाई नियमों के अनुसार की जाएगी। नोटिस में कहा गया है कि संबंधित व्यक्ति यदि वास्तव में पात्र नहीं हैं, तो उन्हें सरकारी लाभ की राशि नियमानुसार जमा करनी होगी अथवा राशन कार्ड वापस कर अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा।
प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय के भीतर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की जा रही है और सभी मामलों की व्यक्तिगत जांच की जाएगी।
पिछले कुछ वर्षों से केंद्र और राज्य सरकारें सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल सत्यापन और डाटा मिलान की प्रक्रिया चला रही हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक और पात्र परिवारों तक पहुंचे।
इसी अभियान के तहत आयकर और अन्य सरकारी डाटाबेस के आधार पर अपात्र राशन कार्डधारकों की पहचान की जा रही है। कई जिलों में ऐसे लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, ताकि वे अपना पक्ष रख सकें या स्वेच्छा से राशन कार्ड वापस कर सकें।
रांची राशन कार्ड विवाद का असर केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। इस मामले ने राजनीतिक हलकों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी सरकारी योजनाओं की पात्रता और पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अपात्र लाभुकों की पहचान प्रभावी ढंग से होती है, तो सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा और जरूरतमंद परिवारों तक योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचेगा।
जिला प्रशासन ने सभी राशन कार्डधारकों से अपील की है कि यदि किसी के पास पात्रता के विपरीत राशन कार्ड है, तो वह स्वयं संबंधित विभाग से संपर्क कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करे। यदि किसी व्यक्ति की आय निर्धारित सीमा से अधिक हो चुकी है या पात्रता समाप्त हो गई है, तो समय रहते राशन कार्ड सरेंडर करना या विभाग को सही जानकारी देना भविष्य की कानूनी कार्रवाई से बचा सकता है।
प्रशासन का कहना है कि जांच अभियान आगे भी जारी रहेगा और सभी मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में सभी लाभुकों को अपने दस्तावेजों और पात्रता की स्थिति की समय-समय पर जांच करते रहना चाहिए।
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