SIR को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया के बीच Form 6 और Form 7 को लेकर उठे सवाल अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुके हैं।
NEWS SAGA DESK
SIR को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया के बीच Form 6 और Form 7 को लेकर उठे सवाल अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुके हैं। 5 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने किसी भी Modified Form 6 को मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने इस मामले में चुनाव आयोग से संबंधित रिकॉर्ड भी मांगा है।
Form 6 में बदलाव पर क्या है विवाद
विवाद की शुरुआत SIR के दौरान ऑनलाइन Form 6 में कथित तौर पर अतिरिक्त जानकारी जोड़े जाने को लेकर हुई। आरोप है कि नए मतदाता के आवेदन में माता-पिता या दादा-दादी से जुड़े पुराने SIR रिकॉर्ड की जानकारी मांगी गई। विपक्षी दलों ने सवाल उठाया कि निर्धारित फॉर्म में बदलाव किसके निर्देश पर किया गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी ऑनलाइन फॉर्म में बदलाव को लेकर सवाल उठाए और पूछा कि इसे लागू करने का निर्देश किस स्तर से दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी संशोधित Form 6 को मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने चुनाव आयोग से रिकॉर्ड मांगते हुए यह जानने की कोशिश की कि फॉर्म में बदलाव कैसे और किस प्रक्रिया के तहत किया गया। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि जांच में निर्धारित प्रक्रिया या जरूरी सहमति का पालन नहीं होने की बात सामने आती है, तो संबंधित फैसलों पर दोबारा विचार किया जा सकता है।
Form 6 और Form 7 क्यों हैं जरुरी
Form 6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नया नाम दर्ज कराने के लिए किया जाता है। वहीं Form 7 किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने या मतदाता सूची से नाम हटाने के आवेदन के लिए इस्तेमाल होता है। SIR के दौरान Form 7 को लेकर भी विपक्षी दलों ने कई आरोप लगाए हैं। कर्नाटक और तेलंगाना समेत कुछ राज्यों में बड़ी संख्या में Form 7 दाखिल होने को लेकर सवाल उठाए गए। हालांकि, किसी भी नाम को हटाने के लिए निर्धारित सत्यापन और चुनावी प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है।
झारखंड में भी SIR पर नजर
झारखंड में भी मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में Form 6, Form 7 और Form 8 मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि Form 6 में कथित बदलाव किस प्रक्रिया के तहत हुआ और इससे जुड़े रिकॉर्ड में क्या सामने आता है। SIR को लेकर विवाद अब राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर न्यायिक जांच के दायरे में पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड से इस पूरे मामले की तस्वीर और साफ हो सकती है।
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