News Saga Desk
रांची। विश्व बैंक ने झारखंड में चल रही जोहार परियोजना की जमकर प्रशंसा की है। ग्रामीण विकास विभाग के तहत झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) द्वारा संचालित इस परियोजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दी है। पिछले चार वर्षों में इस योजना के तहत महिलाओं के नेतृत्व में गठित 21 फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FPO) ने मिलकर करीब 21 मिलियन अमेरिकी डॉलर का कारोबार किया है। यह न सिर्फ आर्थिक रूप से उल्लेखनीय है, बल्कि महिला सशक्तिकरण का एक सशक्त उदाहरण भी है।
विश्व बैंक ने रांची के कांके क्षेत्र में काम कर रहे एक उत्पादक समूह की अध्यक्ष आशा देवी और उनके जैसी हजारों महिलाओं की उपलब्धियों की विशेष सराहना की है। अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में विश्व बैंक ने लिखा, “आज हम अपने व्यवसाय के हर पहलू को समझते हैं—लाभ के मार्जिन से लेकर बाजार की मांग तक। हमने मिलकर संवाद करना सीखा है और अब हम जानते हैं कि हमें किसी भी हाल में कम पर समझौता नहीं करना है।”
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी एक्स पर इस पोस्ट को साझा करते हुए लिखा, “झारखंड की मेरी माताएं-बहनें आज सशक्त होकर आगे बढ़ रही हैं। आप सभी ऐसे ही आगे बढ़ती रहें, आपका यह बेटा और भाई हमेशा आपके साथ है।”जोहार परियोजना आज झारखंड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की मिसाल बन चुकी है।
क्या है जोहार परियोजना
जोहार का मतलब है- Jharkhand opportunities for harnessing rural growth. विश्व बैंक के सहयोग से जेएसएलपीएस का संचालन किया गया. मई 2017 से जून 2024 तक जोहार परियोजना का संचालन हुआ। इसमें विश्व बैंक की 70% ऋण सहायता और राज्य सरकार का 30% अंशदान रहा। जेएसएलपीएस के मुताबिक झारखंड के 17 जिलों के 68 प्रखंडों में कृषि, पशुधन, मत्स्य पालन और लघु वनोपज क्षेत्र के 3,500 उत्पादक समूहों के समर्थन से 2 लाख ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि करने में सफल रहा है। इसके तहत 2.24 लाख उत्पादकों को 3922 उत्पादक समूह में संगठित किया गया। इनका समर्थन देने के लिए करीब 17 हजार सामुदायिक कैडरों को प्रशिक्षित किया गया है. ताकि महिलाएं इससे जुड़कर अपने पैरों पर खड़ा हो सकीं।
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