विनय कुमार चौबे को हजारीबाग वनभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। नवंबर 2025 से जेल में बंद निलंबित IAS अधिकारी को बड़ी राहत मिली।
रांची। झारखंड के निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हजारीबाग डीसी के कार्यकाल के दौरान कथित अवैध वन भूमि की खरीद-बिक्री और अनियमितता से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने विनय कुमार चौबे की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद अब उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।

यह मामला हजारीबाग में वन भूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री और उससे जुड़ी अनियमितताओं को लेकर दर्ज ACB कांड संख्या 11/2025 से जुड़ा हुआ है। इस मामले में विनय कुमार चौबे को नवंबर 2025 में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इसके बाद उन्होंने जमानत के लिए झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली।
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे
विनय कुमार चौबे ने जमानत के लिए झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया था। मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 28 अप्रैल को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और जमानत की मांग की।
अब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। अदालत के इस फैसले के बाद उनकी रिहाई की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। लंबे समय से जेल में रहने के बाद यह फैसला विनय कुमार चौबे के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
ACB कांड संख्या 11/2025 में दर्ज है मामला
हजारीबाग वनभूमि मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी ACB ने कांड संख्या 11/2025 दर्ज किया था। मामला विनय कुमार चौबे के हजारीबाग उपायुक्त के कार्यकाल के दौरान वन भूमि की कथित खरीद-बिक्री और अनियमितताओं से जुड़ा है।
मामले में जांच के दौरान कई लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया। जांच एजेंसी ने कथित अनियमितताओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की। इसके बाद नवंबर 2025 में विनय कुमार चौबे की गिरफ्तारी हुई और उन्हें जेल भेज दिया गया।
73 लोगों को बनाया गया है नामजद आरोपी
इस मामले में विनय कुमार चौबे के अलावा 73 लोगों को नामजद आरोपी बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें विनय चौबे के करीबी बताए जाने वाले विनय सिंह, उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह, हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद, तत्कालीन सीओ शैलेश कुमार और ब्रोकर विजय सिंह समेत अन्य लोग शामिल हैं।
मामले के आरोपी विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह को भी अदालत से जमानत मिल चुकी है। अब विनय कुमार चौबे को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।
मामले की पृष्ठभूमि विनय कुमार चौबे के हजारीबाग डीसी के कार्यकाल से जुड़ी हुई है। आरोप है कि इस दौरान वन भूमि की खरीद-बिक्री और उससे जुड़े मामलों में अनियमितता हुई। इसी को लेकर ACB ने कांड संख्या 11/2025 दर्ज की और जांच शुरू की।
जांच के बाद मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया गया। इसके बाद विनय कुमार चौबे को नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया। जेल जाने के बाद उन्होंने कानूनी राहत के लिए पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने का सबसे बड़ा असर विनय कुमार चौबे की हिरासत पर पड़ेगा। अब आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि मामले में लगाए गए आरोप समाप्त हो गए हैं। मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि या खारिज होने का फैसला अदालत की आगे की सुनवाई और अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका स्वीकार करते हुए विनय कुमार चौबे को राहत दी है। इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने 28 अप्रैल को उनकी जमानत याचिका खारिज की थी। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने शीर्ष अदालत का रुख किया था।
इसे भी देखें...Bankipur By-Election 2026: Prashant Kishor's Major Allegation! "It's the police, not the BJP, fig...
जनता के लिए यह समझना जरूरी है कि किसी आरोपी को जमानत मिलना दोषमुक्ति नहीं होती। हजारीबाग वनभूमि मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है। मामले में नामजद अन्य आरोपियों को लेकर भी आगे की कार्रवाई अदालत और जांच एजेंसी की प्रक्रिया के अनुसार होगी।
अब इस मामले में आगे की सुनवाई, जांच की प्रगति और अन्य आरोपियों से जुड़े कानूनी घटनाक्रम महत्वपूर्ण होंगे। सुप्रीम कोर्ट से विनय कुमार चौबे को मिली जमानत फिलहाल मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम है।
No Comment! Be the first one.