पटना AIIMS में डॉक्टरों की हड़ताल, विधायक से माफी की मांग पर अड़े; चेतन आनंद से मारपीट बना विवाद की जड़

News Saga Desk

फुलवारीशरीफ, पटना। पटना AIIMS के डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। बुधवार की देर रात शिवहर विधायक चेतन आनंद और उनकी पत्नी के साथ हुए मारपीट और दुर्व्यवहार के बाद AIIMS के डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार कर दिया है। डॉक्टरों ने कैंपस में मार्च करते हुए विधायक तुम मांफी मांगो, वी वांट जस्टिस के नारे भी लगाएं। रेजिडेंट डॉक्टरों ने इसे लेकर लिखित आवेदन पटना AIIMS के अधीक्षक को दी है।

इन डॉक्टरों ने लिखा पत्र

आवेदन मेंं वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. जीशान खान (ट्रॉमा सर्जरी) डॉ. अनुपम कुमार (ट्रॉमा सर्जरी) डॉ. व्याख्या गुप्ता (ओएमएफएस) डॉ. शुभम भारद्वाज (ऑर्थोपेडिक्स) डॉ. शिवम शर्मा (बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी) और जूनियर रेजिडेंट डॉ. अमन वर्मा (रेडियोथेरेपी) डॉ. अजय यादव (सीएफएम) डॉ. राहुल कसौधन (एनेस्थीसिया) डॉ. कुलदीप शर्मा (एफएमटी) डॉ. सिथार्थन एम (आपातकालीन चिकित्सा) डॉ. अमित गुप्ता (एनेस्थीसिया) डॉ. सिद्धार्थ सौरभ (नेत्र विज्ञान) डॉ. आनंद कुमार यादव (सीएफएम) डॉ. सयानी दास घोष (ट्रॉमा सर्जरी) डॉ. रितेश कुमार (रेडियोथेरेपी) डॉ. प्राची जैन (रेडियोलॉजी) डॉ. आस्था प्रियदर्शिनी (मनोचिकित्सा) ने संयुक्त रूप से पत्र लिखा है।

मुख्यमंत्री के साथ शिवहर विधायक चेतन आनंद।

मुख्यमंत्री के साथ शिवहर विधायक चेतन आनंद।

डॉक्टरों को जान से मारने की धमकी दी

पत्र में कहा गया है कि शिवहर विधायक चेतन आनंद, उनकी पत्नी डॉ. आयुषी सिंह और उनके सशस्त्र गार्ड जबरन अस्पताल परिसर में घुस आए, सुरक्षा कर्मचारियों के साथ मारपीट की, रेजिडेंट डॉक्टरों को जान से मारने की धमकी दी और अस्पताल परिसर में बंदूक लहराई।

एक अस्पताल के गार्ड को हथियार के बट से बुरी तरह घायल कर दिया गया और हमारे रेजिडेंट डॉक्टरों को उनके ही कार्यस्थल पर धमकियों, दुर्व्यवहार और भय का सामना करना पड़ा। इस घटना के बावजूद प्रशासन ने अपने कर्मचारियों की सुरक्षा या न्याय दिलाने के लिए कोई निर्णायक कानूनी या संस्थागत कार्रवाई नहीं की है। कार्रवाई में इस विफलता ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच भय और लाचारी का माहौल पैदा कर दिया है।

डॉक्टर्स की मांगें-:

1. अस्पताल परिसर में पर्याप्त और स्थायी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाए।

2. प्रशासन द्वारा घटना का औपचारिक लिखित आश्वासन और सार्वजनिक निंदा की जाए।

3. ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य पेशेवरों की सुरक्षा के लिए ठोस और स्थायी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जाए।

डॉक्टर्स ने कहा है कि सेवाओं को रोकने का हमारा फैसला हल्के में नहीं लिया गया है। हम मरीज़ों की देखभाल के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन हम अपने जीवन और सम्मान को ख़तरे में डालकर काम नहीं कर सकते और न ही करेंगे। सेवा बाधित होने और उसके परिणामों की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और अधिकारियों की होगी जो सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने में विफल रहे।


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