News Saga Desk
रांची। मुख्य सचिव अलका तिवारी, नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार व अन्य पर नगर निकाय चुनाव संबंधी अवमाना मामले में झारखंड हाईकोर्ट 14 अक्तूबर को चार्ज फ्रेम करेगा। लेकिन दिलचस्प रूप से चार्ज फ्रेम होने से पहले ही अलका तिवारी मुख्य सचिव पद से 30 सितंबर 2025 को रिटायर कर जाएंगी। वह मुख्य सचिव पद के दायित्व से मुक्त हो जाएंगी। अब यह अलग विषय है कि हाईकोर्ट अलका तिवारी को पर्सनल आइडेंटिटी में चार्ज फ्रेम करे। मालूम हो कि नगर निकाय चुनाव करा पाने को लेकर हाईकोर्ट सख्त और गंभीर दिख रहा है। वह 14 अक्तूबर तक राज्य सरकार को एक और मौका देने का संकेत दे रहा है। यहां राज्य में कोरोना काल से, 2020 से लंबित नगर निकायों के चुनाव को लेकर अब तक क्या हुआ, इसे भी हम समझने की कोशिश कर रहे हैं।
कोरोना महामारी को देखते हुए राज्य सरकार ने 2020 में उन नगर निकायों में चुनाव कराने में असमर्थता जतायी, जिसका कार्यकाल समाप्त हो गया था। उसके बाद धीरे-धीरे राज्य के लगभग सभी नगर निकायों के कार्यकाल समाप्त हो गए। इसके बाद सरकार ने चुनाव कराने के मामले को टालते चली गयी। रांची नगर निगम की पार्षद रोशनी खलखो द्वारा झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गयी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को पहले कई मौके दिए। फिर चुनाव कराने का आदेश दिया। सरकार द्वारा दी गयी समय सीमा के भीतर चुनाव नहीं होने पर रोशनी खलखो और रीना कुमार ने अवमानना याचिका दायर की। अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कब क्या आदेश-निर्देश दिया और राज्य सरकार ने कब कब कोर्ट से क्या कहा।
न्यायाधीश आनंदा सेन, न्यायाधीश आदेश (दिनांक: 10.09.2025)
1. राज्य की ओर से दाखिल हलफ़नामा रिकॉर्ड पर लिया गया।
2. 02.09.2025 को मुख्य सचिव, झारखंड ने अदालत में उपस्थित होकर कहा था कि पहले “ट्रिपल टेस्ट” होगा और उसके बाद शहरी निकाय चुनाव होंगे। इस पर न्यायालय ने पूरी फ़ाइल पेश करने का निर्देश दिया था।
3. इसके बाद राज्य सरकार की ओर से 93 पृष्ठों की नोटिंग कोर्ट में प्रस्तुत की गयी। लेकिन 05.01.2024 से 19.01.2024 तक की नोटिंग (पृष्ठ 89 से 93) में 04.01.2024 के न्यायालय के आदेश (जिसमें चुनाव कराने का निर्देश था) का कोई उल्लेख नहीं है।
इस फ़ाइल को ज्ञानेंद्र कुमार, अब रिटायर (अतिरिक्त सचिव) और विनय कुमार चौबे (प्रधान सचिव) ने प्रोसेस किया और मुख्यमंत्री ने उसी पर अनुमोदन कर दिया। न्यायालय की राय है कि मुख्यमंत्री को न्यायालय का आदेश जानबूझकर नहीं बताया गया।
4. पृष्ठभूमि:
शहरी निकाय चुनाव नहीं होने पर W.P.(C) No.1923/2023 और W.P.(C) No.2290/2023 दाखिल हुए। राज्य ने बचाव में कहा कि ट्रिपल टेस्ट ज़रूरी है।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले (सुरेश महाजन बनाम मध्य प्रदेश राज्य, (2022) 12 SCC 770) पर भरोसा करते हुए कहा कि ट्रिपल टेस्ट चुनाव कराने की अनिवार्य शर्त नहीं है और चुनाव कराना ही होगा। यह आदेश (04.01.2024) L.P.A. No.57/2024 में भी बरकरार रखा गया। राज्य ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी नहीं दी।
5. इसके बावजूद चुनाव नहीं कराए गए। 02.02.2024 को अवमानना याचिका दाखिल हुई। राज्य ने समय लिया, लेकिन चुनाव नहीं हुए।
16.01.2025 को मुख्य सचिव ने कहा कि 4 माह में चुनाव करा देंगे, पर समय निकल गया और चुनाव नहीं हुए।
6. 18.07.2025 को न्यायालय ने कहा कि राज्य चुनाव कराने में गंभीर नहीं है और फिर से मुख्य सचिव को बुलाया।
7. 02.09.2025 को मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार ने “इन प्रिंसिपल” निर्णय लिया है कि पहले ट्रिपल टेस्ट होगा फिर चुनाव।
अदालत ने कहा यह सीधे-सीधे अदालत के आदेश की अवहेलना है।
8. आज (10.09.2025) राज्य ने हलफ़नामा दाखिल कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट में “मुखिया चुनाव” को लेकर एक अवमानना वाद (Cont. Case No.705/2022) हुआ था, जहाँ राज्य ने कहा था कि आगे चुनावों में ट्रिपल टेस्ट करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है इसलिए और निर्देश नहीं दिए जा सकते।
लेकिन यह सिर्फ़ राज्य की दलील थी, सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं कि ट्रिपल टेस्ट के बिना चुनाव नहीं हो सकते।
9. न्यायालय ने पाया कि राज्य जानबूझकर ट्रिपल टेस्ट का बहाना बनाकर आदेश को टाल रहा है।
10. अदालत की राय:
04.01.2024 का आदेश (ट्रिपल टेस्ट के बिना चुनाव कराने का) अंतिम आदेश है और राज्य इसे मानने के बजाय टालमटोल कर रहा है। अधिकारियों ने न्यायालय का आदेश कैबिनेट या मंत्री-इन-चार्ज को नहीं बताया। यह जानबूझकर आदेश को दबाना है। यह प्रत्यक्ष अवमानना (Contempt of Court) है।
11. आदेश:
अवमानना का नोटिस जारी किया जाए इन अधिकारियों को:
ज्ञानेंद्र कुमार (अतिरिक्त सचिव, शहरी विकास एवं आवास विभाग)
विनय कुमार चौबे (प्रधान सचिव, शहरी विकास एवं आवास विभाग)
वंदना ददल (गृह सचिव, झारखंड सरकार)
मुख्य सचिव, झारखंड सरकार
14.10.2025 को सुबह 10:30 बजे सभी अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें। तब उनके खिलाफ़ आरोप तय किए जाएंगे।
12. पूरी फ़ाइल की एक कॉपी एडवोकेट जनरल को दी जाएगी और मूल फ़ाइल हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की निगरानी में रहेगी।
जहां निकाय चुनाव होना है
नगर निगम-रांची, हजारीबाग, मेदनीनगर, धनबाद, गिरिडीह, देवघर, चास, आदित्यपुर और मानगो.
नगर परिषद-गढ़वा, विश्रामपुर, चाईबासा, झुमरी तिलैया, चक्रधरपुर, चतरा, चिरकुंडा, दुमका, पाकुड़, गोड्डा, गुमला, जुगसलाई, कपाली, लोहरदगा, सिमडेगा, मधुपुर, रामगढ़, साहिबगंज, फुसरो और मिहिजाम.
नगर पंचायत-बंशीधर नगर, मझिआंव, हुसैनाबाद, हरिहरगंज, छतरपुर, लातेहार, कोडरमा, डोमचांच, बड़की सरैया, धनवार, महगामा, राजमहल, बरहरवा, बासुकीनाथ, जामताड़ा, बुंडू, खूंटी, सरायकेला और चाकुलिया.
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