News Saga Desk
Indian National Congress ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। रांची स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी नेत्री Yashaswini Sahay ने कहा कि देश में महिलाओं के आरक्षण की नींव कांग्रेस ने रखी थी, लेकिन आज इस मुद्दे पर सिर्फ राजनीति की जा रही है।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi ने सबसे पहले महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में पहल की थी। कांग्रेस लगातार महिला सशक्तिकरण के पक्ष में रही है, लेकिन वर्तमान समय में महिला आरक्षण के नाम पर गंभीरता से काम करने के बजाय इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।
2023 में पास बिल अब तक लागू नहीं
यशस्विनी सहाय ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक वर्ष 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया गया था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सभी दल इस पर सहमत थे, तो इसके क्रियान्वयन में देरी क्यों हो रही है।
परिसीमन और जनगणना पर सवाल
कांग्रेस नेत्री ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण बिल की आड़ में परिसीमन (Delimitation) की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को परिसीमन से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बिना जनगणना कराए परिसीमन कैसे किया जाएगा, यह एक बड़ा सवाल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनसंख्या के सटीक आंकड़ों के बिना परिसीमन करना न्यायसंगत नहीं होगा और इससे कई वर्गों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।
पिछड़े वर्ग की महिलाओं के अधिकार का मुद्दा
यशस्विनी सहाय ने यह भी कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि महिला आरक्षण में पिछड़े वर्ग (OBC) की महिलाओं को किस तरह प्रतिनिधित्व और सम्मान मिलेगा। उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे पर सरकार स्पष्ट नीति सामने लाए। कांग्रेस ने महिला आरक्षण के प्रभावी और न्यायपूर्ण क्रियान्वयन की मांग करते हुए कहा कि इसे राजनीतिक लाभ के बजाय सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से लागू किया जाना चाहिए।
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