News Saga Desk
सर्कुलर रोड स्थित न्यू सर्किट हाउस में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा की अध्यक्षता में तीन दिवसीय समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई। 27 से 29 अप्रैल तक चली इस बैठक में आयोग की टीम के साथ विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के समापन के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में डॉ. आशा लकड़ा ने बताया कि आयोग देशभर में जनजातीय समुदाय से जुड़े मामलों की लगातार सुनवाई कर रहा है। झारखंड के 10 जिलों जैसे कि रांची, लोहरदगा, खूंटी, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी एवं पश्चिमी सिंहभूम, हजारीबाग, रामगढ़ और लातेहार से जुड़े कुल 66 मामलों की सुनवाई की गई।
सर्विस और एट्रोसिटी के मामलों पर फोकस
इन मामलों में सर्विस मैटर और अत्याचार (एट्रोसिटी) से जुड़े मामले प्रमुख रहे। साथ ही कोल इंडिया, एनटीपीसी, सीसीएल, रेलवे, पशुपालन, स्वास्थ्य, कल्याण और विद्युत विभाग से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। आयोग के हस्तक्षेप के बाद कई मामलों में त्वरित कार्रवाई देखने को मिली।
झारखंड कल्याण विभाग की बुधनी देवी के पेंशन और पीएफ से जुड़े मामले का समाधान किया गया। वहीं, एक जनजातीय महिला की संदिग्ध मृत्यु के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी हुई और पीड़ित परिवार को करीब 4 लाख रुपये का मुआवजा दिलाया गया। इसके अलावा, मत्स्य विभाग की अधिकारी अलका कच्छप को लंबित प्रमोशन भी आयोग के संज्ञान के बाद प्रदान किया गया।
आदिवासी जमीन कब्जा मामला सबसे गंभीर
बैठक में सबसे गंभीर मुद्दा आदिवासी जमीनों से जुड़े मामलों का रहा। डॉ. लकड़ा ने कहा कि झारखंड में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) के उल्लंघन के कई मामले सामने आए हैं, जहां आदिवासी जमीनों पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।
रांची के काके क्षेत्र के चमागांव में ऐसे 6 मामलों की सुनवाई की गई, जहां लोगों को डराकर जमीन हस्तांतरण का प्रयास किया गया। आयोग ने जिला प्रशासन को तत्काल एफआईआर दर्ज करने, वारंट जारी करने और शीघ्र चार्जशीट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही आयोग ने डीजीपी और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस चौकी स्थापित करने की सिफारिश की है, ताकि आदिवासी समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी जताई चिंता
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी आयोग ने चिंता व्यक्त की। सरायकेला-खरसावां और चाईबासा में मरीजों को उचित परिवहन सुविधा नहीं मिलने के मामलों पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने राज्य सरकार को एनजीओ और सामाजिक संस्थाओं के साथ समन्वय कर एंबुलेंस सेवा सुनिश्चित करने का सुझाव दिया है।
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