बिहार में सम्राट सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार, निशांत कुमार हो सकते है मंत्रिमंडल में शामिल

बिहार में मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का गुरुवार को बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार होने जा रहा है। राजधानी पटना के गांधी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में कुल 28 से 30 नए मंत्री शपथ ले सकते है। इसमें भाजपा कोटे से 14 और जदयू कोटे से 13 नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। लोजपा र के पास 1 और हम को 1 सीट मिलने की सम्भावना है।

इस विस्तार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष ध्यान देते हुए कई नए और अनुभवी चेहरों को जगह दी जा सकती है। भाजपा कोटे से शपथ लेने वालों में संजय सरावगी, कृष्ण कुमार मंटू, डॉ. सुनील कुमार, मोतीलाल प्रसाद, राजू कुमार सिंह, विजय कुमार मंडल और जिबेश कुमार समेत कई नेताओं के नाम सामने आरहे। वहीं जदयू कोटे से रत्नेश सदा, निशांत कुमार, श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, मदन सहनी, ज़मा खान, शीला मंडल और लेसी सिंह सहित कई नेताओं मंत्रिमंडल में शामिल होने की सम्भावना है। सरकार की ओर से जल्द ही मंत्रियों के विभागों का आवंटन किया जाएगा। माना जा रहा है कि कई वरिष्ठ नेताओं को पहले की तरह महत्वपूर्ण विभाग मिल सकते हैं।

गांधी मैदान में जुटे भाजपा और एनडीए के दिग्गज

शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah, भाजपा अध्यक्ष Nitin Nabin, केंद्रीय मंत्री Jagat Prakash Nadda और Rajnath Singh के शामिल होने के लिए पटना पहुँच चुके है ।

इसके अलावा एनडीए के कई सहयोगी दलों के नेता और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी समारोह में मौजूद है। केंद्रीय मंत्री Chirag Paswan ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने सम्राट चौधरी

सम्राट चौधरी बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। भाजपा और जदयू गठबंधन की इस नई सरकार को आगामी विधानसभा चुनावों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

बिना विधायक बने मंत्री बनने का संवैधानिक प्रावधान

मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे ज्यादा चर्चा जदयू नेता Nishant Kumar को लेकर रही। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके मंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है, जबकि वे वर्तमान में न तो विधायक हैं और न ही विधान परिषद सदस्य। भारतीय संविधान के अनुसार, कोई भी व्यक्ति बिना विधायक या विधान पार्षद बने मंत्री पद की शपथ ले सकता है। हालांकि, उसे छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। ऐसा नहीं होने पर मंत्री पद छोड़ना पड़ता है।

सूत्रों के मुताबिक, जदयू नेतृत्व चाहता है कि निशांत कुमार को संगठन और सरकार दोनों में जिम्मेदारी देकर सक्रिय राजनीति में बड़ी भूमिका दी जाए। पार्टी उन्हें विधान परिषद के जरिए सदस्य बनाकर संवैधानिक प्रक्रिया पूरी कर सकती है।

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