डेयरी सेक्टर में बड़ा बदलाव यूपी सरकार गो-पालन पर दे रही है भारी सब्सिडी, जानें कैसे उठाएं लाभ

News Saga Desk

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्वदेशी गायों के संरक्षण और दुग्ध उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए योगी सरकार ने एक महा-योजना (डेयरी मास्टर प्लान) तैयार किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश पर प्रदेश में चार बड़ी योजनाएं लागू की गई हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्वदेशी नस्ल की गायों को बढ़ावा देने की इस रणनीति को ‘ऑपरेशन-4’ के रूप में देखा जा रहा है।

इन योजनाओं के तहत दो गाय से लेकर 25 गाय तक की डेयरी स्थापित करने पर सरकार द्वारा लाखों रुपये का अनुदान (सब्सिडी) दिया जा रहा है।

क्या है योगी सरकार का ‘ऑपरेशन-4’?
इस रणनीति के केंद्र में चार प्रमुख योजनाएं शामिल हैं, जो पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई हैं:

  • मुख्यमंत्री स्वदेशी गो संवर्धन योजना
  • मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना
  • नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना
  • मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना

पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि उन्नत स्वदेशी नस्ल की गायों को पालने के लिए सरकार भारी वित्तीय सहायता दे रही है। नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना और मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना के तहत डेयरी की स्थापना और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए 50 फीसदी तक का अनुदान दिया जा रहा है।

योजना का वित्तीय मॉडल:

लाभार्थी निवेश: 15 फीसदी

बैंक ऋण: 35 फीसदी

सरकारी सब्सिडी: 50 फीसदी तक

इस खास मॉडल से छोटे और मध्यम किसानों के लिए अपना खुद का डेयरी व्यवसाय शुरू करना बेहद आसान हो गया है। मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना: इस योजना के तहत यदि कोई पशुपालक दो गायों की छोटी डेयरी इकाई शुरू करता है, तो उसे अधिकतम 80 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसका उद्देश्य गांव-गांव में आधुनिक डेयरी नेटवर्क विकसित करना है। उच्च गुणवत्ता और अधिक दूध देने वाली स्वदेशी गायों को पालने वाले प्रगतिशील पशुपालकों को 10,000 से 15,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि (पुरस्कार) दी जा रही है।

गिर, साहीवाल और गंगातीरी नस्ल पर विशेष फोकस

योगी सरकार का मुख्य ध्यान गिर, साहीवाल और गंगातीरी जैसी उन्नत और अधिक दूध देने वाली स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन पर है। इन योजनाओं के जरिए गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को डेयरी सेक्टर से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की रणनीति पर काम चल रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई गति मिल रही है।

अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार, इन योजनाओं के जमीन पर सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। इसके तहत अब तक 1,500 से अधिक डेयरी इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं। बेहतर पशुपालन के लिए 7,250 से ज्यादा पुरस्कार वितरित किए जा चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 72 बड़ी डेयरी इकाइयां शुरू हो चुकी हैं। मिनी नन्दिनी योजना के अंतर्गत 245 डेयरी इकाइयों की स्थापना कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी गई है।

Read More News

Read More