भारत में महंगाई की मार, आम जनता का बिगड़ा बजट, ईंधन के साथ साथ बढ़े दूध सब्जियों के दाम

News Saga Desk

पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर अब भारत की आम जनता की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। पिछले 48 घंटों में देशभर में महंगाई ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। ईंधन, दूध, सब्जियां, सोना-चांदी, निर्माण सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक्स समेत रोजमर्रा की कई जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ गए हैं। बढ़ती महंगाई ने आम आदमी का घरेलू बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आयात लागत बढ़ने के कारण भारत की थोक महंगाई दर भी साढ़े तीन साल के उच्चतम स्तर 8.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है। डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट ने भी संकट को और गहरा कर दिया है। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक ₹3 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में हर जरूरी सामान और महंगा होने की आशंका जताई जा रही है।

सीएनजी उपभोक्ताओं को भी राहत नहीं मिली है। दिल्ली-एनसीआर सहित कई शहरों में CNG के दाम ₹1 प्रति किलो तक बढ़ा दिए गए हैं। राजधानी दिल्ली में CNG की कीमत ₹80.09 प्रति किलो और गाजियाबाद में ₹88.70 प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसके अलावा घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडरों की कीमतों में भी लगातार इजाफा देखा जा रहा है, जिससे रसोई का खर्च तेजी से बढ़ रहा है। देश की प्रमुख डेयरी कंपनियों अमूल और मदर डेरी ने दूध की कीमतों में ₹2 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है। कंपनियों का कहना है कि पशु चारा, पैकेजिंग और परिवहन लागत बढ़ने के कारण दाम बढ़ाना जरूरी हो गया था। अमूल का भैंस का दूध अब कई शहरों में ₹80 प्रति लीटर तक पहुंच गया है।

सब्जियों और किराना बाजार में भी तेजी देखने को मिल रही है। टमाटर, अदरक, गोभी जैसी सब्जियों के साथ-साथ सरसों तेल, रिफाइंड तेल, हल्दी और चायपत्ती जैसी आवश्यक वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।

वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ा है, जिसके चलते सोने और चांदी की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। सोने की कीमतों में इस सप्ताह करीब ₹800 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं चांदी ने आम लोगों को और बड़ा झटका दिया है। चांदी की कीमतों में प्रति किलो ₹12,300 तक की भारी तेजी देखी गई है।

निर्माण क्षेत्र में भी महंगाई का असर साफ दिखाई दे रहा है। स्टील और सीमेंट कंपनियों ने कच्चे माल की लागत बढ़ने का हवाला देते हुए दाम बढ़ा दिए हैं। स्टील रीबार और हॉट रोल्ड कॉइल्स की कीमतों में तेजी से निर्माण कार्य की लागत बढ़ गई है। गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर, फ्रिज और वॉटर कूलर जैसी इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की मांग बढ़ने के बीच कंपनियों ने कीमतों में 5 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है।

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होकर ₹95 प्रति डॉलर के पार पहुंच गया है। इससे आयातित वस्तुएं लगातार महंगी हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है। वहीं Reserve Bank of India ने फिलहाल रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है और महंगाई की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

लगातार बढ़ती कीमतों ने मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। घरेलू बजट बिगड़ने से लोगों को अब खाने-पीने से लेकर यात्रा और निर्माण तक हर क्षेत्र में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और डॉलर की कीमतों में स्थिरता नहीं आई, तो महंगाई का दबाव आने वाले हफ्तों में और बढ़ सकता है।

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