वैश्विक दबाव और पश्चिम एशिया तनाव से शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 700 अंक से अधिक टूटा

NEWS SAGA DESK

मुंबई :- वैश्विक बाजारों में कमजोरी और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। कारोबार शुरू होते ही चौतरफा बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर पड़ गई।

शुरुआती कारोबार में बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 724.95 अंक गिरकर 73,518.39 पर पहुंच गया। वहीं एनएसई का निफ्टी 222.45 अंक टूटकर 23,138.60 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में भी बड़ी कमी दर्ज की गई।

वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय बाजार में गिरावट की प्रमुख वजह वैश्विक बाजारों में कमजोरी है। अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान भारी बिकवाली दर्ज की गई, जिसका असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया। दक्षिण कोरिया, जापान, चीन और हांगकांग के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) क्षेत्र से जुड़े शेयरों में मुनाफावसूली का दबाव देखा जा रहा है।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से बढ़ी चिंता

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है, इसलिए तेल की कीमतों में वृद्धि महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ा सकती है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव बना रही है। हाल के कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़ी मात्रा में पूंजी निकाली, जिससे निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ और बाजार में नकदी का दबाव बढ़ा।

इन शेयरों पर रहा दबाव

कारोबार के दौरान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंडिगो, ट्रेंट और बजाज फाइनेंस के शेयरों में प्रमुख गिरावट दर्ज की गई। वहीं बाजार की कमजोरी के बीच सन फार्मा, पावर ग्रिड, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और एक्सिस बैंक के शेयर अपेक्षाकृत मजबूत बने रहे।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। इन कारकों में स्थिरता आने तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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