08 जून विशेष: हबीब तनवीर की पुण्यतिथि पर नमन, जिन्होंने लोक कला को दी नई पहचान

News saga Desk

भारतीय रंगमंच के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तिथि है। इसी दिन वर्ष 2009 में भारतीय रंगमंच के महान नाटककार, निर्देशक, कवि और अभिनेता हबीब तनवीर का निधन हुआ था। उन्हें भारतीय लोक रंगमंच को नई पहचान देने और उसे राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने का श्रेय दिया जाता है।

हबीब तनवीर का जन्म 1 सितंबर 1923 को रायपुर (वर्तमान छत्तीसगढ़) में हुआ था। उनका मूल नाम हबीब अहमद खान था, लेकिन साहित्य और रंगमंच की दुनिया में वे हबीब तनवीर के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्होंने अपने लंबे रंगमंचीय जीवन में लोककला और आधुनिक थिएटर का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।

उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में आगरा बाजार और चरणदास चोर शामिल हैं। इन नाटकों ने भारतीय रंगमंच को नई दिशा दी और आम लोगों की भाषा, संस्कृति तथा जीवन संघर्षों को मंच पर जीवंत रूप से प्रस्तुत किया। उन्होंने 1959 में ‘नया थिएटर’ की स्थापना की, जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकनाट्य शैली ‘नाचा’ को देश-दुनिया तक पहुंचाया।

हबीब तनवीर को भारतीय कला और संस्कृति में उनके अमूल्य योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले। उन्हें 1969 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 1983 में पद्मश्री और 2002 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। वे राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी रहे।

08 जून 2009 को भोपाल में 85 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनके निधन को भारतीय रंगमंच के एक युग का अंत माना गया। आज उनकी पुण्यतिथि पर देशभर के कलाकार, रंगकर्मी और कला प्रेमी उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करते हैं। हबीब तनवीर का योगदान भारतीय रंगमंच की धरोहर के रूप में सदैव अमर रहेगा।

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