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Khan Sir Defamation Case | दिल्ली हाईकोर्ट ने खान सर और अन्य कोचिंग शिक्षकों के खिलाफ दायर मानहानि याचिका में टीवी पत्रकार को तत्काल राहत देने से इनकार किया। कोर्ट ने जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 जून तय की है।
Khan Sir Defamation Case: दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई, टीवी पत्रकार को नहीं मिली तत्काल राहत
नई दिल्ली: चर्चित कोचिंग शिक्षक खान सर और अन्य कोचिंग संचालकों के खिलाफ दायर मानहानि याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने फिलहाल टीवी पत्रकार को कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने मामले में सभी संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई 17 जून को निर्धारित की है।
दिल्ली हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच की अध्यक्षता कर रहीं जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान खान सर समेत अन्य कोचिंग संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने को कहा। अदालत ने फिलहाल किसी भी प्रकार का अंतरिम आदेश पारित नहीं किया।
क्या है पूरा विवाद?
मामला एक टीवी पत्रकार द्वारा दायर मानहानि याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो और पोस्ट में पत्रकार के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया।
याचिकाकर्ता का दावा है कि उन्हें “बिकाऊ पत्रकार”, “चाटुकार” और “दल्ली” जैसे शब्दों से संबोधित किया गया। इसके अलावा उन पर कथित रूप से “दलाली करने” और “फेक न्यूज की दुकान चलाने” जैसे आरोप भी लगाए गए।
याचिका में कहा गया है कि इन टिप्पणियों और पोस्टों के कारण उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। साथ ही उनके परिवार को भी मानसिक उत्पीड़न और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का सामना करना पड़ रहा है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
जानकारी के अनुसार विवाद की शुरुआत एक टीवी न्यूज शो से हुई थी। संबंधित पत्रकार ने अपने चैनल पर प्रसारित “स्टार टीचर्स” नामक कार्यक्रम में कुछ कोचिंग संचालकों और शिक्षकों को लेकर टिप्पणी की थी। इस दौरान कथित रूप से उन्हें “दो कौड़ी का टीचर” कहा गया था।
इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बहस छिड़ गई। कई कोचिंग शिक्षकों और संचालकों ने वीडियो जारी कर पत्रकार की आलोचना की। इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का रूप ले लिया, जहां लोगों ने पक्ष और विपक्ष में अपनी राय रखी।
इसके बाद विवाद और बढ़ गया तथा पत्रकार और उनके मीडिया संगठन ने कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया।
दो करोड़ रुपये हर्जाने की मांग
मानहानि याचिका में संबंधित पत्रकार और उनके मीडिया संगठन ने खान सर और कुछ अन्य कोचिंग संचालकों के खिलाफ दो करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है।
याचिका में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर किए गए कथित अपमानजनक और मानहानिकारक बयानों से उनकी पेशेवर छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इसलिए अदालत से उचित मुआवजा और राहत देने की मांग की गई है।
हाईकोर्ट का रुख
दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने केवल इतना कहा है कि सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। इसी कारण कोर्ट ने प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मानहानि से जुड़े मामलों में अदालत आमतौर पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचती है। ऐसे मामलों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के अधिकार के बीच संतुलन बनाना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

सोशल मीडिया पर जारी बहस
यह मामला केवल अदालत तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। एक वर्ग पत्रकार के पक्ष में तर्क दे रहा है, जबकि दूसरा वर्ग कोचिंग शिक्षकों के समर्थन में नजर आ रहा है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती बहस ने इस विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। अब सभी की नजरें 17 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत मामले में आगे की दिशा तय कर सकती है।
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खान सर और अन्य कोचिंग संचालकों के खिलाफ दायर मानहानि याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल टीवी पत्रकार को तत्काल राहत देने से इनकार किया है। कोर्ट ने सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 17 जून तय की है। इस मामले का कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है और आने वाले दिनों में इस पर सभी की नजर बनी रहेगी।
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