झारखंड राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्त नियुक्ति को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार की मंजूरी मिल गई है। अनुज कुमार सिन्हा, तनुज खत्री, अमूल्य नीरज खलखो और शिवपूजन पाठक को सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया है। राज्यपाल ने मुख्य सूचना आयुक्त की शीघ्र नियुक्ति के निर्देश भी दिए हैं।
News Saga Desk
रांची: झारखंड में सूचना के अधिकार (RTI) व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने झारखंड राज्य सूचना आयोग में चार नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के संबंध में राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस निर्णय के तहत अनुज कुमार सिन्हा, तनुज खत्री, अमूल्य नीरज खलखो तथा शिवपूजन पाठक को सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्त किया जाएगा।
यह नियुक्ति झारखंड राज्य सूचना आयोग में लंबे समय से रिक्त पड़े पदों को भरने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। सूचना आयोग नागरिकों को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सूचना उपलब्ध कराने और उससे संबंधित मामलों के निपटारे में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में आयोग में पर्याप्त संख्या में आयुक्तों की उपलब्धता उसके सुचारु संचालन के लिए आवश्यक मानी जाती है।
राज्यपाल ने कुछ शर्तों के साथ दी मंजूरी
राजभवन से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्यपाल ने इन नियुक्तियों को कुछ महत्वपूर्ण शर्तों के साथ अनुमोदित किया है। उन्होंने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि झारखंड राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त (Chief Information Commissioner) की नियुक्ति जल्द से जल्द सुनिश्चित की जाए। राज्यपाल का मानना है कि मुख्य सूचना आयुक्त की अनुपस्थिति में आयोग के कार्यों के संचालन और प्रशासनिक निर्णयों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि आयोग का कार्य प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संचालित हो, इसके लिए मुख्य सूचना आयुक्त का पद शीघ्र भरा जाना आवश्यक है। राज्यपाल ने इस संबंध में राज्य सरकार से त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
प्रक्रियागत त्रुटि होने पर राज्य सरकार होगी जिम्मेदार
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने अपने अनुमोदन में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी दर्ज की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में यदि भविष्य में किसी प्रकार की प्रक्रियागत त्रुटि पाई जाती है या फिर इस मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुपालन से जुड़ा कोई प्रश्न उत्पन्न होता है, तो उसकी संपूर्ण जवाबदेही राज्य सरकार की होगी।
यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सूचना आयोगों में नियुक्तियों को लेकर समय-समय पर न्यायालयों द्वारा दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया का पूरी तरह कानूनी और संवैधानिक मानकों के अनुरूप होना आवश्यक है।
सूचना आयोग की कार्यक्षमता बढ़ने की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि चार नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति से झारखंड राज्य सूचना आयोग की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा। आयोग में लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की संभावना है और सूचना के अधिकार से जुड़े मामलों में आम नागरिकों को राहत मिल सकेगी।
झारखंड में आरटीआई आवेदनों और अपीलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सूचना आयोग में पर्याप्त संख्या में आयुक्तों की नियुक्ति नागरिकों को समय पर न्याय और सूचना उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक मानी जा रही थी। राज्यपाल की मंजूरी के बाद अब इन नियुक्तियों की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने का रास्ता साफ हो गया है।
पारदर्शिता और जवाबदेही को मिलेगा बल
सूचना का अधिकार अधिनियम लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। झारखंड राज्य सूचना आयोग में नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति से न केवल आयोग की कार्यप्रणाली मजबूत होगी, बल्कि सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी बढ़ावा मिलेगा।
राज्यपाल द्वारा मुख्य सूचना आयुक्त की शीघ्र नियुक्ति पर जोर दिए जाने से यह संकेत भी मिलता है कि राज्य में सूचना अधिकार व्यवस्था को और अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं।
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