NEWS SAGA DESK
शिमला :- हिमाचल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की औपचारिक एंट्री से पहले ही जनजातीय जिला किन्नौर में प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला है। बीते दिन चोलिंग क्षेत्र में नेशनल हाईवे-5 पर बना लोहे का पुल ढहने और एक डंपर के सतलुज नदी में समा जाने की घटना के 24 घंटे के भीतर ही काचरंग नाले में आई फ्लैश फ्लड ने व्यापक तबाही मचाई है।
किन्नौर के निचार खंड के अंतर्गत पटवार हलका नातपा के उपमहाल काचरंग क्षेत्र में तड़के बादल फटने जैसी स्थिति के बाद काचरंग नाले में अचानक भीषण बाढ़ आ गई। सुबह करीब तीन बजे आए तेज बहाव ने नाले के आसपास के क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचाया और बड़ी मात्रा में मलबा नीचे की ओर बह गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पानी, पत्थरों और मलबे का तेज बहाव अचानक आया। बाढ़ के कारण क्षेत्र की संपर्क सड़क कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई है, जबकि कुछ हिस्सों में मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है। इससे ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हुआ है और दैनिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
फ्लैश फ्लड का सबसे अधिक असर क्षेत्र की बागवानी पर पड़ा है। किन्नौर की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार सेब उत्पादन है और काचरंग क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में सेब के बगीचे हैं। बाढ़ के साथ आए मलबे ने कई बागानों को प्रभावित किया है। इससे बागवानों की चिंता बढ़ गई है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार लाखों रुपये के नुकसान की आशंका है, हालांकि प्रशासन द्वारा विस्तृत सर्वेक्षण कर वास्तविक क्षति का आकलन किया जा रहा है।
राहत की बात यह रही कि इस प्राकृतिक आपदा में किसी प्रकार की जनहानि या पशुहानि की सूचना नहीं मिली है। नाले का बहाव रिहायशी क्षेत्रों की ओर नहीं मुड़ा, जिससे घरों और आबादी वाले इलाकों को बड़े नुकसान से बचाया जा सका। यदि बाढ़ का रुख आबादी की ओर होता तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती थी।
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र पर लगातार नजर बनाए रखी है और संबंधित विभागों को नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। सड़क बहाली, पेयजल व्यवस्था को सामान्य करने तथा अन्य आवश्यक सेवाओं को पुनर्स्थापित करने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से क्षतिग्रस्त मार्गों की शीघ्र मरम्मत और राहत कार्यों में तेजी लाने की मांग की है, ताकि क्षेत्र में सामान्य जनजीवन जल्द बहाल हो सके।
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