रिश्वत लेते वीडियो वायरल होने पर राजस्व कर्मचारी निलंबित, जांच समिति गठित

NEWS SAGA DESK

कटिहार :- कटिहार जिले के आजमनगर प्रखंड अंतर्गत पिंढात पंचायत में पदस्थापित राजस्व कर्मचारी सुनील ठाकुर को रिश्वत लेने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति से अवैध राशि लेते हुए उनका वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की है। जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी के निर्देश पर आरोपित कर्मचारी के विरुद्ध बिहार सरकारी सेवक नियमावली-2005 के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है।

जिला प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में राजस्व कर्मचारी को एक व्यक्ति से नकद राशि लेते हुए देखा गया। वीडियो सामने आने के बाद इसकी प्रारंभिक जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि संबंधित कर्मचारी का आचरण एक सरकारी सेवक की गरिमा, निष्पक्षता और कर्तव्यनिष्ठा के अनुरूप नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने 23 जून 2026 से सुनील ठाकुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

निलंबन अवधि के दौरान संबंधित कर्मचारी का मुख्यालय निर्धारित किया जाएगा तथा उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। साथ ही उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच कर दोष की पुष्टि की जाएगी।

मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता अपर समाहर्ता-सह-जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, कटिहार को सौंपी गई है। समिति में अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। उन्हें मामले से जुड़े सभी तथ्यों, वीडियो की सत्यता, शिकायतकर्ता के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच का दायित्व सौंपा गया है।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या नरमी नहीं बरती जाएगी। जांच समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपे जाने के बाद यदि आरोप प्रमाणित पाए जाते हैं, तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ आवश्यक वैधानिक कदम भी उठाए जाएंगे।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन लगातार राजस्व विभाग सहित विभिन्न सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत हैं। ऐसे में रिश्वतखोरी से जुड़े मामलों पर त्वरित कार्रवाई को प्रशासन की भ्रष्टाचार के प्रति ‘शून्य सहिष्णुता’ नीति के रूप में देखा जा रहा है।

जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा अवैध धन की मांग की जाती है तो इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।

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