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मुख्य सचिव रवि कोटा और ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर एंड्रयू फ्लेमिंग के बीच बैठक में व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, कौशल विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में साझेदारी मजबूत करने पर चर्चा हुई।
भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच अगले महीने लागू होने जा रहे मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट-एफटीए) से पहले असम और ब्रिटेन के बीच आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने की पहल शुरू हो गई है। इसी कड़ी में बुधवार को असम के मुख्य सचिव रवि कोटा और ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर एंड्रयू फ्लेमिंग के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य एफटीए से मिलने वाले अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए दोनों पक्षों के बीच सहयोग का एक व्यापक और रणनीतिक रोडमैप तैयार करना था।
बैठक में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के अलावा निर्यात क्षमता बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने, आधारभूत संरचना के विकास तथा कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों का मानना है कि 15 जुलाई 2026 से लागू होने वाला भारत-यूके एफटीए दोनों पक्षों के लिए नए आर्थिक अवसरों के द्वार खोलेगा और असम जैसे उभरते राज्यों को वैश्विक निवेश एवं व्यापार नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्य सचिव रवि कोटा ने कहा कि असम की अर्थव्यवस्था तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। राज्य में औद्योगिक विकास, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और डिजिटल क्षेत्र में हो रहे सुधारों ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है। उन्होंने कहा कि यूनाइटेड किंगडम के साथ गहरे आर्थिक और तकनीकी संबंध असम की विकास यात्रा को नई गति दे सकते हैं।
बैठक के दौरान ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल ने असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एपीडीसीएल) के लिए तैयार की गई यूके पैक्ट समर्थित बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) आवश्यकता मूल्यांकन एवं विश्लेषण रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में राज्य की बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के उपयोग से न केवल ग्रिड की स्थिरता और विश्वसनीयता बढ़ेगी, बल्कि अक्षय ऊर्जा स्रोतों के बेहतर उपयोग का मार्ग भी प्रशस्त होगा। यह पहल असम के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को गति देने में सहायक साबित हो सकती है। राज्य सरकार लंबे समय से हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में कार्य कर रही है, ऐसे में यह सहयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैठक में गुवाहाटी में प्रस्तावित असम-यूके इंफ्रास्ट्रक्चर राउंडटेबल के आयोजन पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस मंच के माध्यम से दोनों पक्ष सतत शहरी विकास, परिवहन नेटवर्क के विस्तार, बाढ़ प्रबंधन, जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे और परियोजना क्रियान्वयन में सहयोग के नए अवसर तलाशेंगे। अधिकारियों के अनुसार इस पहल में यूके एक्सपोर्ट फाइनेंस की संभावित भागीदारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
डिजिटल परिवर्तन और उभरती तकनीकों को लेकर भी बैठक में गंभीर चर्चा हुई। प्रस्तावित यूके-भारत सॉवरेन एआई पार्टनरशिप के तहत असम के लिए उपलब्ध संभावनाओं का आकलन किया गया। चर्चा के प्रमुख विषयों में भरोसेमंद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंफ्रास्ट्रक्चर, सॉवरेन क्लाउड क्षमताएं, उन्नत कंप्यूटिंग सिस्टम और एआई गवर्नेंस फ्रेमवर्क शामिल रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन पहलों से राज्य की डिजिटल सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में दक्षता बढ़ेगी।
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मुख्य सचिव रवि कोटा ने कहा कि यह बैठक केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका उद्देश्य एफटीए से मिलने वाले अवसरों को वास्तविक परियोजनाओं और निवेश में बदलना है। उन्होंने कहा कि बेहतर व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और संस्थागत साझेदारी के जरिए असम और ब्रिटेन के बीच संबंधों को और मजबूत बनाया जाएगा।
वहीं ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर एंड्रयू फ्लेमिंग ने इस बैठक को एफटीए लागू होने से पहले सही समय पर उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि चर्चा में इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कौशल विकास, खेल, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा जैसे कई अहम क्षेत्र शामिल रहे। फ्लेमिंग ने विश्वास जताया कि भारत-यूके एफटीए दोनों देशों के साथ-साथ असम जैसे राज्यों के लिए भी विकास और निवेश के नए अवसर लेकर आएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि प्रस्तावित योजनाएं प्रभावी रूप से लागू होती हैं, तो असम पूर्वोत्तर भारत में अंतरराष्ट्रीय निवेश, तकनीकी नवाचार और हरित विकास का प्रमुख केंद्र बन सकता है। भारत-यूके एफटीए के लागू होने से पहले हुई यह बैठक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम मानी जा रही है।
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