Anticipatory Bail मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने शिक्षाविद अभय कुमार मिश्रा को राहत दी। 25 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत देने का आदेश जारी।
News Saga Desk
झारखंड हाईकोर्ट ने Anticipatory Bail याचिका पर सुनवाई करते हुए रांची के शिक्षाविद एवं स्कूल प्रबंधन से जुड़े अभय कुमार मिश्रा को बड़ी राहत प्रदान की है। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने जगन्नाथपुर थाना कांड संख्या 314/2017 से संबंधित मामले में अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है। अदालत ने निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता तीन सप्ताह के भीतर संबंधित निचली अदालत में आत्मसमर्पण करें। आत्मसमर्पण अथवा गिरफ्तारी की स्थिति में उन्हें निर्धारित शर्तों के साथ जमानत पर रिहा किया जाएगा।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि Anticipatory Bail को लेकर अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और न्यायिक सिद्धांतों पर विस्तार से विचार किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल चार्जशीट दाखिल हो जाने के आधार पर अग्रिम जमानत याचिका को खारिज नहीं किया जा सकता।
धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों से जुड़ा मामला
मामले की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी, जब जगन्नाथपुर थाना में अभय कुमार मिश्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, चोरी और आपराधिक षड्यंत्र जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।
पुलिस जांच पूरी होने के बाद 31 दिसंबर 2023 को चार्जशीट दाखिल की गई। इसके बाद निचली अदालत ने मामले में संज्ञान भी ले लिया था। हालांकि, Anticipatory Bail की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्होंने जांच प्रक्रिया में लगातार सहयोग किया है और कभी भी जांच से बचने का प्रयास नहीं किया।
स्कूल प्रबंधन विवाद से जुड़ा है मामला
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि यह मामला स्कूल प्रबंधन और चुनावी विवाद से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
अदालत में यह भी बताया गया कि स्कूल भवन निर्माण, वित्तीय लेनदेन और उनकी पत्नी की नियुक्ति को लेकर जो आरोप लगाए गए हैं, वे निराधार हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार उनकी पत्नी की नियुक्ति वर्ष 2009 में हुई थी, जबकि वे स्वयं वर्ष 2015 में स्कूल के सचिव बने थे। इसलिए नियुक्ति प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि मामला लंबे समय से चल रहे प्रशासनिक और चुनावी विवाद का परिणाम है और इसी कारण उनके खिलाफ आरोप लगाए गए हैं।
विरोध पक्ष ने लगाए गंभीर आरोप
दूसरी ओर, मामले के सूचक महेश तिवारी स्वयं अदालत में उपस्थित हुए और Anticipatory Bail याचिका का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल फंड के दुरुपयोग, भवन निर्माण में कथित अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों में याचिकाकर्ता की भूमिका रही है।
विरोध पक्ष ने आयकर विभाग की कार्रवाई और अन्य वित्तीय मामलों का भी उल्लेख करते हुए अदालत से अग्रिम जमानत नहीं देने की मांग की। हालांकि अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद उपलब्ध रिकॉर्ड और कानूनी तथ्यों के आधार पर फैसला सुनाया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल चार्जशीट दाखिल होने से किसी व्यक्ति की Anticipatory Bail याचिका स्वतः खारिज नहीं हो जाती।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा भारतीय न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। प्रत्येक मामले का मूल्यांकन उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए।
न्यायालय ने माना कि याचिकाकर्ता जांच में सहयोग करते रहे हैं और मामले के सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद उन्हें अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाना उचित होगा।
25 हजार रुपये के मुचलके पर मिली राहत
सभी पक्षों की दलीलों और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने अभय कुमार मिश्रा को Anticipatory Bail प्रदान कर दी। अदालत ने आदेश दिया कि वे तीन सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत में आत्मसमर्पण करें।
आत्मसमर्पण अथवा गिरफ्तारी की स्थिति में उन्हें 25 हजार रुपये के निजी मुचलके तथा समान राशि के दो जमानतदारों के आधार पर रिहा किया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें ट्रायल के दौरान न्यायालय का सहयोग करने और सभी निर्धारित शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया गया है।
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सार्वजनिक जानकारी और आगे की प्रक्रिया
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब अभय कुमार मिश्रा को निर्धारित समयसीमा के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करना होगा। इसके बाद उन्हें जमानत का लाभ मिल सकेगा। हालांकि मामले का ट्रायल जारी रहेगा और अंतिम निर्णय साक्ष्यों एवं न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा सकता है, जहां चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी अदालत व्यक्तिगत स्वतंत्रता और न्यायिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए Anticipatory Bail पर विचार करती है।
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