Drug Import Rules: आयातित दवाओं के नियमों में बड़ा बदलाव, अब 12 महीने की शेल्फ लाइफ होने पर मिलेगी एंट्री

NEWS SAGA DESK

Drug Import Rules में केंद्र सरकार ने बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अब आयातित दवाओं में 12 महीने की शेल्फ लाइफ पर्याप्त होगी, जिससे सप्लाई चेन और उपलब्धता बेहतर होगी।

भारत में दवाओं के आयात से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने Drug Import Rules में संशोधन का प्रस्ताव जारी करते हुए आयातित दवाओं की शेल्फ लाइफ से जुड़े प्रावधानों को आसान बनाने की पहल की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी मसौदा अधिसूचना के अनुसार, अब अधिकांश आयातित दवाओं के भारत में प्रवेश के समय कम से कम 12 महीने की शेल्फ लाइफ शेष होना पर्याप्त होगा। फिलहाल यह नियम है कि दवा की कुल शेल्फ लाइफ का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा बचा होना चाहिए। सरकार का मानना है कि Drug Import Rules में यह बदलाव दवा आपूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाएगा और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद करेगा।

क्या है नया प्रस्ताव?

स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन का मसौदा अधिसूचित किया है और इस पर आम नागरिकों, दवा कंपनियों तथा अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं।

प्रस्ताव के अनुसार, अधिकांश आयातित दवाओं के लिए अब कुल शेल्फ लाइफ के 60 प्रतिशत नियम के बजाय केवल 12 महीने की शेष शेल्फ लाइफ पर्याप्त मानी जाएगी। हालांकि, बायोलॉजिकल दवाओं और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स के मामले में वर्तमान व्यवस्था जारी रहेगी और उनके लिए 60 प्रतिशत शेल्फ लाइफ का नियम पहले की तरह लागू रहेगा।

Drug Import Rules:

क्यों जरूरी है Drug Import Rules में बदलाव?

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि मौजूदा नियमों के कारण कई बार अच्छी गुणवत्ता वाली दवाएं केवल शेल्फ लाइफ की तकनीकी शर्त पूरी नहीं करने के कारण भारत में आयात नहीं हो पाती थीं। इससे दवा कंपनियों को स्टॉक प्रबंधन में कठिनाई होती थी और कई दवाएं समय से पहले नष्ट करनी पड़ती थीं।

Drug Import Rules में प्रस्तावित संशोधन से कंपनियां अपने स्टॉक का बेहतर उपयोग कर सकेंगी। इससे दवाओं की बर्बादी कम होगी, लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और सप्लाई चेन अधिक व्यवस्थित बन सकेगी।

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मरीजों और बाजार पर क्या होगा असर?

यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो देश में कई आवश्यक आयातित दवाओं की उपलब्धता बेहतर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर स्टॉक प्रबंधन से दवाओं की आपूर्ति में आने वाली बाधाएं कम होंगी और जरूरत के समय दवाएं तेजी से उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

इसके साथ ही कंपनियों पर अतिरिक्त भंडारण और नष्ट होने वाले स्टॉक का आर्थिक बोझ भी कम होगा। इसका सकारात्मक प्रभाव दवा बाजार की दक्षता पर पड़ सकता है।

हालांकि, यह बदलाव केवल शेल्फ लाइफ संबंधी आयात नियमों तक सीमित रहेगा। दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता के सभी मौजूदा मानकों में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है।

मंत्रालय का आधिकारिक बयान

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अपनी विज्ञप्ति में स्पष्ट किया है कि Drug Import Rules में प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य केवल आयात प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक बनाना है।

मंत्रालय के अनुसार, इस बदलाव से दवाओं की सप्लाई चेन अधिक प्रभावी होगी, दवाओं की बर्बादी कम होगी और कंपनियां अपने स्टॉक का बेहतर प्रबंधन कर सकेंगी। इससे लागत में कमी आने के साथ-साथ आवश्यक दवाओं की उपलब्धता में भी सुधार होने की उम्मीद है।

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि गुणवत्ता, सुरक्षा, प्रभावशीलता और नियामकीय मानकों से जुड़े सभी नियम पहले की तरह पूरी सख्ती से लागू रहेंगे।

पृष्ठभूमि

भारत दुनिया के सबसे बड़े दवा बाजारों में शामिल है। देश में बड़ी मात्रा में दवाओं का निर्माण होता है, वहीं कई विशेष श्रेणी की दवाएं विदेशों से आयात भी की जाती हैं। ऐसे में आयात संबंधी नियमों का सीधा असर दवा उद्योग, अस्पतालों, मरीजों और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है।

सरकार समय-समय पर दवा क्षेत्र से जुड़े नियमों की समीक्षा करती रही है ताकि बदलती वैश्विक परिस्थितियों और आपूर्ति तंत्र के अनुरूप नीतियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

आम लोगों के लिए क्या जानकारी जरूरी है?

सामान्य मरीजों को इस प्रस्तावित बदलाव से घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह संशोधन केवल आयात के समय दवा की शेष शेल्फ लाइफ से संबंधित है। बाजार में उपलब्ध दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

सरकार ने मसौदा अधिसूचना पर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम संशोधित नियम लागू किए जाएंगे।

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