Suman Roadmap 2030 आज जारी होगा। मातृ एवं नवजात मृत्यु दर कम करने, उच्च जोखिम गर्भावस्था प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने पर रहेगा फोकस।
News Saga Desk
भारत में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा सोमवार को Suman Roadmap 2030 जारी करेंगे। यह रणनीतिक दस्तावेज मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने तथा वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्य (SDG) हासिल करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार Suman Roadmap 2030 एक व्यापक, बहुआयामी और साक्ष्य-आधारित योजना है, जो देशभर में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने का काम करेगी।
मातृ स्वास्थ्य सुधार की दिशा में बड़ा कदम
पिछले एक दशक में भारत ने मातृ स्वास्थ्य और नवजात देखभाल के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। हालांकि कई राज्यों और जिलों में अभी भी ऐसी चुनौतियां मौजूद हैं, जिनके कारण मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में अपेक्षित कमी नहीं आ सकी है।
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए Suman Roadmap 2030 में राज्यों की स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुसार अलग-अलग रणनीति बनाई गई है। केंद्र सरकार का मानना है कि सभी राज्यों के लिए एक जैसी योजना के बजाय क्षेत्रीय आवश्यकताओं पर आधारित हस्तक्षेप अधिक प्रभावी साबित होंगे।
गर्भधारण से लेकर प्रसवोत्तर देखभाल तक व्यापक योजना
Suman Roadmap 2030 में गर्भधारण से पहले की स्वास्थ्य देखभाल, गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच, सुरक्षित प्रसव और प्रसव के बाद मां एवं नवजात शिशु की देखभाल को एकीकृत रूप से शामिल किया गया है।
इसके अलावा इस रोडमैप को प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल एवं किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रमों, परिवार नियोजन योजनाओं तथा पोषण अभियानों से भी जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक समन्वित और प्रभावी बनाना है, ताकि महिलाओं और बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं पर विशेष फोकस
इस रणनीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान और प्रबंधन के लिए चार-स्तरीय प्रणाली है।
इसके तहत गर्भावस्था के शुरुआती चरण, विशेष रूप से तीसरी तिमाही, प्रसव के दौरान तथा प्रसव के बाद उच्च जोखिम वाली महिलाओं की पहचान की जाएगी। उनकी नियमित निगरानी, समय पर उपचार और आवश्यक चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जाएगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते जोखिमों की पहचान होने से मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए Suman Roadmap 2030 में इस व्यवस्था को प्रमुखता दी गई है।
13 राज्यों के 130 जिलों में विशेष रणनीति
रोडमैप के तहत 13 उच्च प्राथमिकता वाले राज्यों के 130 जिलों में विशेष रणनीति लागू की जाएगी। इनमें असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

इन जिलों में ‘सुमन पैकेज फॉर प्रेग्नेंट वुमेन’ लागू किया जाएगा। इसके तहत गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण, आवश्यक प्रसवपूर्व जांच, गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा परीक्षण और प्रसव के बाद पर्याप्त संस्थागत देखभाल सुनिश्चित की जाएगी।
आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका होगी अहम
Suman Roadmap 2030 में सामुदायिक स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका को और मजबूत किया गया है। योजना के अनुसार गर्भावस्था के आठवें और नौवें महीने में आशा कार्यकर्ता प्रत्येक पखवाड़े गर्भवती महिलाओं के घर जाकर स्वास्थ्य जांच करेंगी।
वे खतरे के लक्षणों की पहचान, पोषण संबंधी परामर्श, सुरक्षित प्रसव की तैयारी और संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य करेंगी। इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य अवसंरचना और परिवहन सुविधाओं पर जोर
रोडमैप में आपातकालीन रेफरल परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। खासकर दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई प्रस्ताव शामिल किए गए हैं।
इसके तहत बर्थ वेटिंग होम, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) विंग, ऑब्स्टेट्रिक हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) और आईसीयू जैसी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया गया है। साथ ही प्रसव के बाद महिला के साथ रहने वाले नामित देखभालकर्ता को वित्तीय सहायता देने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
सामुदायिक भागीदारी से मिलेगा अभियान को बल
Suman Roadmap 2030 में ‘सुमन पंचायत’ और ‘मदर्स पिकनिक’ जैसी नई अवधारणाओं को भी शामिल किया गया है। सुमन पंचायत का उद्देश्य शून्य मातृ मृत्यु, शून्य शिशु मृत्यु, संस्थागत प्रसव और पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करना है।
वहीं मदर्स पिकनिक पहल के माध्यम से महिलाओं और समुदाय को मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य से जुड़ी अच्छी आदतों और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक किया जाएगा।
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2030 के लक्ष्य हासिल करने में मिलेगी मदद
स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि Suman Roadmap 2030 राज्यों और जिलों की जरूरतों के अनुरूप लक्षित हस्तक्षेप, मजबूत स्वास्थ्य ढांचा, बेहतर सामुदायिक भागीदारी और प्रभावी निगरानी व्यवस्था के जरिए मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती देगा।
यह पहल न केवल मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने में मदद करेगी, बल्कि भारत को वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के करीब भी ले जाएगी।
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