Deoghar Veterinary Hospital: 6 लाख मवेशियों पर गंभीर स्टाफ संकट, बड़ा खुलासा

NEWS SAGA DESK

Deoghar Veterinary Hospital में स्टाफ की भारी कमी से पशुपालक परेशान हैं। 6 लाख से अधिक मवेशियों के इलाज के लिए डॉक्टर और कर्मचारियों की नियुक्ति की मांग तेज हुई।

Deoghar Veterinary Hospital में डॉक्टरों और कर्मचारियों की भारी कमी के कारण पशुपालकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। झारखंड के देवघर स्थित प्रांतीयकृत पशु चिकित्सालय में पिछले एक वर्ष से कंपाउंडर और ड्रेसर के पद खाली पड़े हैं, जिससे पशुओं के इलाज की व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। जिले में छह लाख से अधिक पंजीकृत मवेशी होने के बावजूद अस्पताल में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध नहीं है।

अस्पताल में स्टाफ की भारी कमी

Deoghar Veterinary Hospital में कार्यरत पशु चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि अस्पताल में फिलहाल केवल एक गार्ड और वह स्वयं ही कार्यरत हैं। दोनों के भरोसे प्रतिदिन आने वाले 70 से 80 बीमार पशुओं का इलाज किया जा रहा है। स्टाफ की कमी के कारण कई पशुपालकों को बिना इलाज कराए ही वापस लौटना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि कंपाउंडर और ड्रेसर जैसे महत्वपूर्ण पद पिछले एक वर्ष से खाली हैं, जिससे उपचार कार्य प्रभावित हो रहा है।

Deoghar Veterinary Hospital

कई बार भेजा गया प्रस्ताव

अवर पशुपालन पदाधिकारी डॉ. धनी लाल मंडल ने बताया कि कर्मचारियों की कमी को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है। इसके बावजूद अब तक नई नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं।

उन्होंने कहा कि जिला ही नहीं, बल्कि प्रखंड स्तर के पशु चिकित्सालयों में भी कर्मचारियों की कमी के कारण डॉक्टरों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है।

स्वीकृत पदों के मुकाबले कम कर्मचारी

डॉ. मंडल के अनुसार जिले में पशु चिकित्सकों के 16 स्वीकृत पद हैं, जिनमें 15 पदों पर डॉक्टर कार्यरत हैं। लेकिन सहायक कर्मचारियों की स्थिति बेहद चिंताजनक है।

चपरासी और गार्ड के 15 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 5 से 7 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। ऐसे में अस्पताल की नियमित सेवाओं का संचालन प्रभावित हो रहा है।

6 लाख मवेशियों की स्वास्थ्य सेवा पर असर

देवघर जिले में छह लाख से अधिक पंजीकृत मवेशी हैं। बड़ी संख्या में किसान और पशुपालक सरकारी पशु चिकित्सालयों पर निर्भर रहते हैं। लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण समय पर इलाज नहीं मिल पाने से पशुपालकों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पशुधन किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। ऐसे में पशु चिकित्सालयों में डॉक्टरों के साथ-साथ कंपाउंडर, ड्रेसर और अन्य कर्मचारियों की शीघ्र नियुक्ति आवश्यक है, ताकि पशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

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सरकार से जल्द नियुक्ति की मांग

पशुपालकों और विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि जल्द ही रिक्त पदों पर नियुक्ति नहीं की गई तो पशु स्वास्थ्य सेवाओं पर और अधिक दबाव बढ़ेगा। ऐसे में राज्य सरकार को आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराकर अस्पतालों की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए।

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