Yamuna Water Project: अमित शाह की मौजूदगी में हरियाणा-राजस्थान के बीच ऐतिहासिक समझौता, 580 MCM पानी मिलेगा

NEWS SAGA DESK

Yamuna Water Project पर हरियाणा और राजस्थान के बीच अमित शाह की मौजूदगी में समझौता हुआ। 580 MCM पानी पाइपलाइन से राजस्थान पहुंचेगा, लाखों लोगों को मिलेगा पेयजल।

Yamuna Water Project को लेकर हरियाणा और राजस्थान के बीच लंबे समय से लंबित मुद्दे का समाधान हो गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में दोनों राज्यों ने यमुना जल परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस परियोजना के तहत जुलाई से अक्टूबर के बीच पश्चिमी यमुना नहर से लगभग 580 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से राजस्थान पहुंचाया जाएगा।

केंद्र सरकार का कहना है कि यह समझौता दोनों राज्यों की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ सहकारी संघवाद का एक मजबूत उदाहरण भी है।

580 MCM पानी पहुंचाने की होगी व्यवस्था

समझौते के अनुसार पश्चिमी यमुना नहर से तीन बड़ी भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए राजस्थान तक पानी पहुंचाया जाएगा। इन पाइपलाइनों का व्यास 3.6 मीटर से अधिक होगा। इस परियोजना से राजस्थान और हरियाणा दोनों राज्यों के लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।

अमित शाह ने क्या कहा?

समझौते के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह परियोजना हरियाणा और राजस्थान के लोगों की लगभग 30 वर्ष पुरानी पेयजल समस्या के समाधान की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘संवाद से समाधान’ और ‘सहकारी संघवाद’ के विजन का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। शाह ने कहा कि राज्यों के बीच सहयोग की भावना से लंबे समय से लंबित विवादों का भी समाधान संभव है।

Yamuna Water Project

किन जिलों को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ?

Yamuna Water Project के पूरा होने के बाद राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनूं जिलों के लाखों लोगों को पेयजल उपलब्ध होगा। वहीं हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिलेगा।

सरकार का मानना है कि इससे शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बेहतर होगी और लोगों को राहत मिलेगी।

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समझौते में क्या-क्या शामिल है?

समझौते में परियोजना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है। इनमें—

  • लागत और वित्तीय दायित्व
  • जल आवंटन की व्यवस्था
  • पानी छोड़ने की प्रक्रिया
  • पाइपलाइन का रखरखाव
  • निगरानी प्रणाली
  • पारदर्शिता
  • विवाद निपटान की व्यवस्था

केंद्रीय जल आयोग द्वारा तैयार इस ढांचे को भविष्य में विवाद-मुक्त व्यवस्था के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

भूजल स्तर बढ़ाने में भी मिलेगी मदद

अमित शाह ने कहा कि अब तक बारिश का जो पानी बेकार बह जाता था, उसका बेहतर उपयोग किया जाएगा। इससे लोगों को पेयजल मिलने के साथ-साथ बड़े जलाशयों में पानी संग्रहित होगा, जिससे भूजल स्तर को भी रिचार्ज करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने इसे दोनों राज्यों के लिए ‘विन-विन’ स्थिति बताया।

परियोजना का उद्देश्य

Yamuna Water Project का उद्देश्य वर्ष 1994 के उच्च यमुना बेसिन जल साझेदारी समझौते के तहत राजस्थान को आवंटित जल हिस्से को पश्चिमी यमुना नहर के माध्यम से भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली द्वारा राज्य तक पहुंचाना है। इससे लाखों लोगों को विश्वसनीय पेयजल मिलेगा और क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।

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