झारखंड SCADA सिस्टम फेल: 60 करोड़ की हाईटेक निगरानी व्यवस्था ठप

NEWS SAGA DESK

झारखंड SCADA सिस्टम फेल होने से रांची, धनबाद और जमशेदपुर में बिजली की रियल-टाइम निगरानी ठप है। जानें कैसे 60 करोड़ की परियोजना बेकार हुई।

रांची, जमशेदपुर और धनबाद में बिजली आपूर्ति की निगरानी के लिए स्थापित झारखंड SCADA सिस्टम फेल होने का मामला अब गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी चिंता का विषय बन गया है। करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस अत्याधुनिक प्रणाली के ठप होने से तीनों प्रमुख शहरों में बिजली आपूर्ति की ऑनलाइन रियल-टाइम मॉनिटरिंग बंद हो गई है। इसके कारण फॉल्ट का पता लगाने और बिजली बहाल करने में पहले की तुलना में अधिक समय लग रहा है, जिससे हजारों उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं।

झारखंड SCADA सिस्टम फेल

क्या है SCADA सिस्टम और क्यों था महत्वपूर्ण?

SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) एक आधुनिक डिजिटल निगरानी प्रणाली है, जिसके माध्यम से बिजली सब-स्टेशनों और फीडरों की 24 घंटे ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाती है। इस सिस्टम की मदद से कंट्रोल रूम में बैठे इंजीनियर किसी भी फॉल्ट, ओवरलोड या तकनीकी समस्या का तुरंत पता लगा सकते थे और संबंधित टीम को तत्काल कार्रवाई के लिए निर्देश दे सकते थे।

झारखंड SCADA सिस्टम फेल होने के बाद यह पूरी व्यवस्था बाधित हो गई है। अब अधिकांश सूचनाएं फोन के माध्यम से प्राप्त की जा रही हैं, जिससे मरम्मत कार्य में देरी हो रही है और उपभोक्ताओं को लंबे समय तक बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है।

2019 में शुरू हुई थी महत्वाकांक्षी परियोजना

रिस्ट्रक्चर्ड एक्सीलरेटेड पावर डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म्स प्रोग्राम (R-APDRP) के तहत वर्ष 2019-20 में रांची, धनबाद और जमशेदपुर में SCADA सिस्टम स्थापित किया गया था। राजधानी रांची में इसका मुख्य कंट्रोल रूम डोरंडा स्थित कुसई कॉलोनी में बनाया गया था और 15 अगस्त 2019 को इसका शुभारंभ हुआ था। परीक्षण पूरा होने के बाद वर्ष 2020 से यह पूरी क्षमता के साथ संचालित होने लगा।

इस परियोजना के तहत रांची के 44, धनबाद के 20 और जमशेदपुर के 22 पावर सब-स्टेशनों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा गया था। आधुनिक एलईडी स्क्रीन, कंप्यूटर आधारित नियंत्रण प्रणाली और ऑटोमेटेड उपकरणों के जरिए बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जाती थी।

झारखंड SCADA सिस्टम फेल

आखिर कैसे ठप हो गया पूरा सिस्टम?

जानकारी के अनुसार, SCADA सिस्टम के संचालन और रखरखाव के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ पांच वर्षों का अनुबंध किया गया था। वर्ष 2024 में डेटा नेटवर्क उपलब्ध कराने वाली एजेंसी ने अपनी सेवाएं सीमित कर दीं, जबकि वर्ष 2025 के अंत तक सिस्टम के संचालन और रखरखाव का अनुबंध भी समाप्त हो गया।

बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारियों को समय रहते इसकी जानकारी दे दी गई थी, लेकिन नए अनुबंध या टेंडर की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी। इसके परिणामस्वरूप कंट्रोल रूम की बड़ी स्क्रीन बंद हो गईं, नेटवर्क कनेक्टिविटी समाप्त हो गई और धीरे-धीरे पूरा सिस्टम निष्क्रिय होता चला गया।

उपभोक्ताओं पर क्या पड़ रहा है असर?

झारखंड SCADA सिस्टम फेल होने के बाद सबसे अधिक असर आम बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ा है। पहले किसी फीडर में खराबी आने पर कंट्रोल रूम में तुरंत अलर्ट मिल जाता था और कुछ ही मिनटों में संबंधित टीम मौके पर पहुंचकर बिजली बहाल कर देती थी।

अब फॉल्ट की जानकारी मैनुअल तरीके से जुटानी पड़ रही है। कई बार पूरी लाइन की जांच करनी पड़ती है, जिससे बिजली बहाली में अधिक समय लगता है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यापारिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अधिकारियों का क्या कहना है?

जेबीवीएनएल के जीएम (आईटी) संजय कुमार ने स्वीकार किया कि डेटा नेटवर्क और SCADA संचालन से जुड़े अनुबंध क्रमशः वर्ष 2024 और 2025 में समाप्त हो चुके थे। उन्होंने बताया कि एजेंसियों द्वारा रखरखाव के लिए अधिक लागत का प्रस्ताव दिया गया था, जिसके कारण मामला लंबित रहा।

उन्होंने कहा कि अब नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया अपनाई जा रही है। यदि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी हो जाती हैं तो पूरे सिस्टम को फिर से चालू करने में लगभग छह से आठ महीने का समय लग सकता है।

पृष्ठभूमि

झारखंड सरकार और बिजली वितरण निगम ने शहरी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से SCADA प्रणाली लागू की थी। इस तकनीक से बिजली वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी, तेज और आधुनिक बनी थी। शुरुआती वर्षों में इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए थे, लेकिन समय पर रखरखाव और अनुबंध का नवीनीकरण नहीं होने से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो गई।

प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि SCADA जैसी तकनीकी प्रणाली का लंबे समय तक बंद रहना बिजली वितरण व्यवस्था की कार्यकुशलता को प्रभावित करता है। इससे फॉल्ट पहचानने में देरी, बिजली कटौती की अवधि बढ़ने और उपभोक्ताओं की शिकायतों में वृद्धि जैसी समस्याएं सामने आती हैं। यदि जल्द ही सिस्टम को दोबारा चालू नहीं किया गया तो भविष्य में शहरी बिजली प्रबंधन और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।


इसे भी देखें...Ranchi University Foundation Day 2026 | मेधावी छात्रों और खिलाड़ियों का सम्मान

सार्वजनिक जानकारी

बिजली उपभोक्ताओं को किसी भी फॉल्ट या लंबे समय तक बिजली बाधित रहने की स्थिति में संबंधित बिजली उपकेंद्र या स्थानीय विद्युत कार्यालय से संपर्क करने की सलाह दी गई है। विभाग ने संकेत दिया है कि नई व्यवस्था लागू होने तक मैनुअल निगरानी प्रणाली के माध्यम से बिजली आपूर्ति बनाए रखने का प्रयास जारी रहेगा।

Read More News

विश्व जनसंख्या दिवस पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की बड़ी घोषणा, झारखंड के सभी जिलों में बनेंगे मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल

रांची में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- जनसंख्या बोझ नहीं, बल्कि राज्य...

रांची में पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा 2026 को लेकर 11 परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर दायरे में धारा-163 लागू

12 जुलाई को होने वाली झारखंड पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा के शांतिपूर्ण संचालन के लिए जिला प्रशासन की...

हिमांशु हत्याकांड में बड़ा खुलासा, मुख्य आरोपित राहुल दुबे की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल चापड़ बरामद

हिमांशु हत्याकांड में बड़ा खुलासा, मुख्य आरोपित राहुल दुबे की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल चापड़...

जमशेदपुर के साकची में अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद, टिस्को वाटर टावर के पास मिली लाश; जांच में जुटी पुलिस

पूर्वी सिंहभूम जिले के जमशेदपुर शहर के साकची थाना क्षेत्र में शनिवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब...

Read More