धनबाद में आरएसएस की युवा संगोष्ठी: युवाओं से ‘पंच परिवर्तन’ अपनाकर राष्ट्र निर्माण में भागीदारी का आह्वान

NEWS SAGA DESK

धनबाद में आरएसएस की युवा संगोष्ठी में 223 युवाओं ने भाग लिया। शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ ने युवाओं से पंच परिवर्तन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को धनबाद में एक विशेष युवा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। आईआईटी (आईएसएम) के जीजेएलटी सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में 20 से 35 वर्ष आयु वर्ग के 223 युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों तथा सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े युवा शामिल थे। संगोष्ठी का उद्देश्य युवाओं के साथ राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और संघ के ‘पंच परिवर्तन’ अभियान पर संवाद स्थापित करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद आईआईटी (आईएसएम) के प्रोफेसर धीरज कुमार ने कार्यक्रम की भूमिका प्रस्तुत करते हुए युवाओं की सकारात्मक सोच और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल अपने करियर तक सीमित न रहे, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी सक्रिय भागीदारी निभाए।

पंच परिवर्तन अभियान पर विशेष जोर

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता एवं क्षेत्र सामाजिक सद्भाव संयोजक राकेश लाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि शताब्दी वर्ष युवाओं के लिए प्रेरणा का अवसर है। उन्होंने कहा कि देश के भविष्य को मजबूत बनाने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

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उन्होंने संघ के ‘पंच परिवर्तन’ अभियान के पांच प्रमुख विषयों—पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध, सामाजिक समरसता, स्वदेशी जीवनशैली और नागरिक कर्तव्य—पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों को दैनिक जीवन में अपनाकर हर व्यक्ति समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकता है।

राकेश लाल ने कहा कि केवल शिक्षा और रोजगार ही पर्याप्त नहीं हैं। युवाओं में संस्कार, अनुशासन और देशभक्ति का भाव भी उतना ही आवश्यक है। जब युवा इन मूल्यों के साथ आगे बढ़ेंगे, तभी आत्मनिर्भर और विकसित भारत का सपना साकार होगा।

युवाओं ने रखे सवाल, मिला मार्गदर्शन

कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें उपस्थित युवाओं को पदाधिकारियों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला। राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता, पंच परिवर्तन और वर्तमान समय में युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर युवाओं ने अपने सवाल रखे, जिनका विस्तार से उत्तर दिया गया।

इस संवाद के दौरान वक्ताओं ने युवाओं को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए नेतृत्व करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े सामाजिक परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।

संगोष्ठी में सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण, अनुशासन, समय प्रबंधन और स्वरोजगार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि समाज में आपसी सद्भाव और सहयोग की भावना को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।

पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में युवाओं से जल संरक्षण, पौधारोपण, स्वच्छता अभियान और प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया गया। साथ ही यह संदेश दिया गया कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी से संभव है।

घर और समाज से बदलाव की शुरुआत का आह्वान

वक्ताओं ने युवाओं से अपील की कि वे सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत अपने घर, परिवार और मोहल्ले से करें। स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव जैसे कार्यों में स्वयं आगे बढ़कर दूसरों को भी प्रेरित करें।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल बड़े अभियानों से नहीं, बल्कि आम नागरिकों के छोटे-छोटे प्रयासों से होता है। यदि प्रत्येक युवा अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करे, तो विकसित भारत का लक्ष्य निश्चित रूप से प्राप्त किया जा सकता है।

संगोष्ठी के समापन पर वक्ताओं ने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं और राष्ट्र की प्रगति का आधार भी। इसलिए युवाओं को सकारात्मक सोच, अनुशासन, सेवा भाव और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के इस आयोजन के माध्यम से युवाओं को यह संदेश दिया गया कि ‘पंच परिवर्तन’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने की जीवनशैली है। यदि युवा इन पांच मूल्यों को अपने जीवन में अपनाते हैं, तो आत्मनिर्भर, समरस और विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य अधिक मजबूत आधार पर आगे बढ़ सकेगा।

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