फहीम खान रिहाई मामला: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा

NEWS SAGA DESK

फहीम खान रिहाई मामला: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के रिहाई आदेश को बरकरार रखा। राज्य सरकार की अपील खारिज, जानिए पूरा मामला और कोर्ट की टिप्पणी।

फहीम खान रिहाई मामला एक बार फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट ने सगीर हसन सिद्दीकी हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे फहीम खान को रिहा करने संबंधी झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। इसके साथ ही झारखंड सरकार की ओर से दायर अपील को भी खारिज कर दिया गया। इस फैसले के बाद फहीम खान की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने राज्य सरकार और फहीम खान की ओर से पेश की गई दलीलों पर सुनवाई की। अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए सरकार की याचिका खारिज कर दी।

फहीम खान रिहाई मामला

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

फहीम खान रिहाई मामला में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि झारखंड हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने राज्य सरकार की अपील स्वीकार करने से इनकार कर दिया और हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

इस निर्णय के बाद फहीम खान की रिहाई से जुड़ी कानूनी बाधाएं काफी हद तक समाप्त हो गई हैं। हालांकि, राज्य सरकार आगे उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकती है।

हाईकोर्ट ने किस आधार पर दिया था रिहाई का आदेश?

इस मामले में 7 नवंबर 2025 को झारखंड हाईकोर्ट की एकलपीठ ने फहीम खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर उन्हें रिहा करने का निर्देश दिया था।

हाईकोर्ट ने कहा था कि रिहाई समीक्षा बोर्ड ने वर्ष 2007 की संशोधित रिमिशन नीति के आधार पर रिहाई से इनकार किया, जबकि इस मामले में 1984 की रिमिशन नीति लागू होनी चाहिए थी।

अदालत के अनुसार सत्र न्यायालय ने इस मामले में फैसला 15 जून 1991 को सुनाया था। इसलिए पुराने नियमों के अनुसार रिहाई पर विचार किया जाना चाहिए था।

मामला सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा?

फहीम खान रिहाई मामला में हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी निर्धारित समय सीमा के भीतर रिहाई नहीं हुई। इसके बाद फहीम खान ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की।

उधर, झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के निर्णय को सही ठहराते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 10 मई 1989 को धनबाद के वासेपुर क्षेत्र में हुई सगीर हसन सिद्दीकी की हत्या से जुड़ा है।

वर्ष 2009 में झारखंड हाईकोर्ट ने फहीम खान को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद 21 अप्रैल 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा था।

अब ताजा फैसले में अदालत ने केवल रिहाई (रिमिशन) नीति के लागू होने के प्रश्न पर हाईकोर्ट के आदेश को सही माना है।झारखंड में रिमिशन नीति को लेकर कई मामलों में यह सवाल उठता रहा है कि किसी दोषी की रिहाई के लिए कौन-सी नीति लागू होगी। विशेष रूप से उन मामलों में, जिनमें अपराध और सजा पुराने समय की हो, नई और पुरानी नीतियों की व्याख्या महत्वपूर्ण बन जाती है।

फहीम खान का मामला भी इसी कानूनी प्रश्न से जुड़ा रहा, जिसमें 1984 और 2007 की रिमिशन नीतियों के लागू होने पर विवाद था। फहीम खान रिहाई मामला का असर केवल एक व्यक्ति की रिहाई तक सीमित नहीं माना जा रहा है। यह फैसला भविष्य में ऐसे अन्य मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है, जहां रिमिशन नीति के चयन को लेकर विवाद हो।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय उन मामलों में मिसाल बन सकता है, जिनमें अपराध, सजा और रिहाई नीति अलग-अलग समय की हों। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार किया और रिहाई संबंधी आदेश को यथावत रहने दिया

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फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फहीम खान की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, रिहाई की प्रक्रिया संबंधित विभागों द्वारा कानून और जेल नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी। यदि राज्य सरकार आगे कोई कानूनी कदम उठाती है, तो उसकी जानकारी आधिकारिक रूप से सामने आएगी।

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