JSSC-CGL और अन्य नियुक्ति परीक्षाएं रद्द करने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में आज फिर सुनवाई होगी। कोर्ट ने 2500 सफल अभ्यर्थियों के हित और CID जांच पर चिंता जताई।
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित JSSC-CGL समेत अन्य प्रमुख नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में आज गुरुवार को फिर से सुनवाई होगी। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में बुधवार को साढ़े तीन घंटे तक चली लंबी बहस के बाद मामले की अगली सुनवाई आज सुबह 11 बजे तय की गई थी। हाईकोर्ट द्वारा प्रार्थियों को दी गई अंतरिम राहत भी अगले आदेश तक जारी रहेगी।

हाईकोर्ट की गंभीर चिंता: 2500 सफल अभ्यर्थियों के हित से न हो खिलवाड़
बुधवार की सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रक्रिया में सफल रहे करीब 2500 अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर गहरी चिंता प्रकट की। जस्टिस दीपक रोशन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मेरिट के आधार पर अपनी जगह बनाने वाले अभ्यर्थियों के साथ न्याय होना अत्यंत आवश्यक है। अदालत ने कहा कि केवल व्यापक स्तर पर अनियमितता के सामान्य आरोपों के आधार पर निर्दोष और योग्य उम्मीदवारों को प्रताड़ित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब सरकार पूरी प्रणाली में ‘सिस्टमैटिक फेलियर’ (प्रशासकीय विफलता) की बात कह रही है, तो इस महत्वपूर्ण पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन योग्य उम्मीदवारों के हितों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की कार्रवाई के आधार पर कड़े सवाल खड़े किए। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब इस मामले में सीआईडी (CID) की जांच अभी पूरी नहीं हुई है, तो इतनी जल्दी परीक्षा रद्द करने का ठोस आधार क्या है?
अदालत ने जांच की धीमी गति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि ढाई साल से जांच जारी है और राज्य को बिना प्रशासनिक अधिकारियों के लंबे समय तक नहीं छोड़ा जा सकता। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि केवल एक सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंप देने मात्र से परीक्षा रद्द करने जैसे बड़े फैसले को सही नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने पूछा कि क्या यह फैसला किसी बाहरी दबाव में आकर लिया गया है?
राज्य सरकार की दलील: सीलबंद रिपोर्ट और वित्तीय लेन-देन का हवाला
दूसरी तरफ, राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने परीक्षा रद्द करने के निर्णय को पूरी तरह उचित ठहराया। सरकार ने अदालत के समक्ष एक सीलबंद रिपोर्ट प्रस्तुत की और तर्क दिया कि परीक्षा संचालन में बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन और अनियमितताएं पाई गई हैं।
सरकार ने अदालत को बताया कि मामले की जांच में लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं और अब तक 28 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। चूंकि जांच प्रक्रिया अभी जारी है, इसलिए यह छांटना असंभव है कि कौन से अभ्यर्थी धांधली में शामिल थे और कौन पूरी तरह निर्दोष हैं। इसी वजह से पूरी परीक्षा को रद्द करना ही एकमात्र विकल्प था।
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