JSSC फील्ड वर्कर परीक्षा विवाद: संथाली अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द करने की उठाई मांग

JSSC फील्ड वर्कर परीक्षा विवाद गहराया। संथाली अभ्यर्थियों ने 40 आउट ऑफ सिलेबस प्रश्न, 4 गलत उत्तर और एडमिट कार्ड में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए परीक्षा रद्द करने की मांग की।

SSC फील्ड वर्कर परीक्षा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित झारखंड फील्ड वर्कर प्रतियोगिता परीक्षा (JFWCE-2024) को लेकर संथाली भाषा के अभ्यर्थियों ने गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। अभ्यर्थियों का दावा है कि संथाली भाषा के प्रश्नपत्र में 100 में से 40 प्रश्न सिलेबस से बाहर पूछे गए, जबकि 4 प्रश्नों के उत्तर गलत या अमान्य थे। इसके विरोध में मंगलवार को सैकड़ों छात्र JSSC कार्यालय पहुंचे और आयोग से परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने की मांग की।

JSSC कार्यालय पहुंचे सैकड़ों अभ्यर्थी

JSSC फील्ड वर्कर परीक्षा विवाद को लेकर 22 जुलाई को झारखंड के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में संथाली भाषा के अभ्यर्थी रांची स्थित JSSC कार्यालय पहुंचे। पांच छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।

प्रतिनिधिमंडल ने सचिव को बताया कि संथाली भाषा के अभ्यर्थियों के साथ परीक्षा में अन्याय हुआ है। उनका कहना था कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय निर्धारित सिलेबस का पालन नहीं किया गया, जिससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को नुकसान हुआ।

अभ्यर्थियों के अनुसार, संथाली भाषा के प्रश्नपत्र में 100 में से 40 प्रश्न ऐसे थे जो आयोग द्वारा जारी सिलेबस का हिस्सा ही नहीं थे। इसके अलावा 4 प्रश्नों के उत्तर भी गलत या अमान्य बताए गए हैं।

छात्रों का कहना है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप होने चाहिए। यदि बड़ी संख्या में प्रश्न सिलेबस से बाहर होंगे तो परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित होगी और अभ्यर्थियों के साथ न्याय नहीं हो सकेगा।

‘महुआ को संस्कृत में क्या कहते हैं’ सवाल पर उठे सवाल

JSSC फील्ड वर्कर परीक्षा विवाद में सबसे अधिक चर्चा एक प्रश्न को लेकर हो रही है। अभ्यर्थियों ने बताया कि भाषा के पेपर में सवाल पूछा गया था—“महुआ को संस्कृत में क्या कहते हैं?”

छात्रों का कहना है कि यह प्रश्न संथाली भाषा के पेपर में पूछा गया था, जबकि स्वाभाविक रूप से सवाल होना चाहिए था कि “महुआ को संथाली भाषा में क्या कहते हैं?“ उनका आरोप है कि इस तरह के कई प्रश्न परीक्षा के उद्देश्य और सिलेबस से मेल नहीं खाते।

अभ्यर्थियों ने यह भी दावा किया कि कई प्रश्न UPSC और UGC स्तर की परीक्षाओं के अनुरूप थे, जबकि फील्ड वर्कर परीक्षा के घोषित सिलेबस में उनका कोई उल्लेख नहीं था। उनका कहना है कि यदि ऐसे प्रश्न पूछने थे तो आयोग को पहले ही उसी स्तर का सिलेबस जारी करना चाहिए था।

JSSC सचिव ने दिया समीक्षा का आश्वासन

JSSC सचिव सुधीर गुप्ता से मुलाकात के बाद अभ्यर्थियों ने बताया कि सचिव ने उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि उत्तर कुंजी (आंसर-की) जारी होने के बाद सभी अभ्यर्थियों को आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा।

इसके बाद विषय विशेषज्ञों की टीम प्राप्त आपत्तियों की समीक्षा करेगी। यदि किसी प्रश्न या उत्तर में त्रुटि पाई जाती है तो आयोग नियमानुसार आवश्यक निर्णय लेगा।

परीक्षा रद्द नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

संथाली भाषा के अभ्यर्थियों ने स्पष्ट कहा है कि यदि उनकी शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई और परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

अभ्यर्थियों ने बताया कि पहले वे संबंधित मंत्री और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी मांग रखेंगे। यदि इसके बाद भी समाधान नहीं निकला तो राज्यव्यापी उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।

JSSC फील्ड वर्कर परीक्षा विवाद केवल प्रश्नपत्र तक सीमित नहीं है। 19 जुलाई को आयोजित JFWCE-2024 परीक्षा में 510 पदों के लिए परीक्षा हुई थी, लेकिन केवल लगभग 26 प्रतिशत अभ्यर्थी ही परीक्षा में शामिल हुए। इतनी कम उपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

इसके अलावा कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि उन्हें परीक्षा के दिन तक या परीक्षा समाप्त होने के बाद एडमिट कार्ड प्राप्त हुआ। कई छात्रों ने यह भी शिकायत की कि परीक्षा से पहले अंतिम दो दिनों में आयोग की वेबसाइट का लिंक ठीक से काम नहीं कर रहा था, जिससे एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में परेशानी हुई।

हालांकि आयोग का कहना है कि वेबसाइट पर समय रहते परीक्षा की सूचना और एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का विकल्प उपलब्ध कराया गया था। आयोग के अनुसार, जिन अभ्यर्थियों को रजिस्ट्रेशन नंबर याद नहीं था, उनके लिए भी अलग सुविधा दी गई थी।

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