NEWS SAGA DESK
रांची के सावन महोत्सव में नेत्रदान जागरूकता अभियान चला। महापौर रोशनी खलखो समेत कई लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लिया।
राजधानी रांची में आयोजित 27वें तीन दिवसीय सावन महोत्सव मेले के दूसरे दिन सामाजिक सेवा और जनजागरूकता का प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला। Ranchi Eye Donation Campaign के तहत अग्रवाल सभा, रांची की महिला समिति शाखा और कश्यप मेमोरियल आई बैंक के संयुक्त तत्वावधान में महाराजा अग्रसेन भवन में नेत्रदान जागरूकता अभियान, सावन सिंधारा और झूलोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने का संकल्प लेकर समाज को सकारात्मक संदेश दिया।

महापौर और उपमहापौर ने लिया नेत्रदान का संकल्प
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रांची की महापौर रोशनी खलखो तथा विशिष्ट अतिथि उपमहापौर नीरज कुमार उपस्थित रहे। दोनों जनप्रतिनिधियों ने अग्रवाल सभा के पदाधिकारियों और अन्य लोगों के साथ नेत्रदान संकल्प पत्र भरकर मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने का निर्णय लिया।
इस अवसर पर महापौर रोशनी खलखो ने कहा कि नेत्रदान जैसे जनहित के अभियान को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि रांची नगर निगम के सभी 53 वार्डों में व्यापक स्तर पर नेत्रदान जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इस पुनीत कार्य से जुड़ सकें।
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उन्होंने भरोसा दिलाया कि रांची नगर निगम इस अभियान को सफल बनाने के लिए हरसंभव सहयोग करेगा।
उपमहापौर नीरज कुमार ने भी लोगों से मृत्यु के बाद नेत्रदान करने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति का नेत्रदान दो दृष्टिहीन लोगों के जीवन में रोशनी ला सकता है। समाज में जागरूकता बढ़ाकर हजारों लोगों को नई जिंदगी दी जा सकती है।
1996 से अब तक 1,089 सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कश्यप मेमोरियल आई बैंक की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. भारती कश्यप ने नेत्रदान की वर्तमान स्थिति और इसकी आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1996 से अब तक आई बैंक के माध्यम से 1,089 सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। इसके बावजूद झारखंड में आज भी बड़ी संख्या में मरीज कॉर्निया प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
डॉ. कश्यप ने कहा कि राज्य में पर्याप्त संख्या में कॉर्निया उपलब्ध नहीं होने के कारण कई बार दूसरे राज्यों से कॉर्निया मंगाना पड़ता है, जिससे मरीजों का आर्थिक बोझ बढ़ जाता है और उपचार में भी देरी होती है।
डॉ. भारती कश्यप ने राज्य के प्रमुख सरकारी और निजी अस्पतालों में कॉर्निया रिट्रीवल प्रोग्राम लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि अस्पतालों में व्यवस्थित रूप से कॉर्निया संग्रह की व्यवस्था विकसित की जाए और समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए, तो भविष्य में कॉर्निया की कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार, स्वास्थ्य संस्थानों और समाज की साझेदारी से “कॉर्निया जनित दृष्टिहीनता मुक्त झारखंड” का सपना साकार किया जा सकता है।
सावन महोत्सव के दौरान आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ सामाजिक सरोकारों को जोड़कर लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सकती है। नेत्रदान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद के जीवन में उजाला लाने का सबसे बड़ा मानवीय उपहार है।
आयोजकों ने लोगों से अपील की कि वे अपने परिवार के साथ नेत्रदान पर चर्चा करें और मृत्यु के बाद आंखें दान करने का संकल्प लेकर समाज में नई रोशनी फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं।
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