CJP Protest March को लेकर कोलकाता में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भाजपा ने विरोध जताया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए समर्थन किया।
News Saga Desk
नीट प्रश्नपत्र लीक, शिक्षा व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित CJP Protest March पर पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है। कोलकाता में होने वाली इस रैली को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) आमने-सामने आ गई हैं। जहां भाजपा ने आंदोलन को लेकर आपत्ति जताई है, वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए समर्थन दिया है।
सीजेपी पिछले कई दिनों से दिल्ली में नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रही है। संगठन की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें।
दिल्ली आंदोलन के बाद अब कोलकाता में मार्च
CJP Protest March का आयोजन कोलकाता में शुक्रवार को प्रस्तावित है। इससे पहले संगठन दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार धरना और प्रदर्शन कर रहा है। इस आंदोलन को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भी समर्थन मिला है।
दिल्ली में जारी प्रदर्शन के दौरान कई कलाकारों और विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने भी आंदोलनकारियों का समर्थन किया है। हालांकि, सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई बातचीत से अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
अब संगठन ने कोलकाता में भी अपनी आवाज बुलंद करने का फैसला किया है। आयोजकों का कहना है कि यह मार्च छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा है।
रैली की अनुमति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं
सीजेपी से जुड़े देदीप्य गांगुली ने बताया कि संगठन ने 24 जुलाई को प्रस्तावित रैली के लिए कोलकाता पुलिस को अनुमति देने का अनुरोध किया है। इसके लिए पुलिस को पत्र भेजने के साथ कई बार ई-मेल भी किया गया, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला है।

प्रस्तावित CJP Protest March कॉलेज स्ट्रीट से शुरू होकर रानी रासमणि एवेन्यू तक निकाला जाना है। आयोजकों के अनुसार, इस मार्च में करीब 1,500 लोगों के शामिल होने की संभावना है।
आयोजकों ने दावा किया है कि यदि प्रशासन अनुमति देता है तो प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा और किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न नहीं होने दी जाएगी।
तृणमूल कांग्रेस ने किया समर्थन
इस प्रस्तावित मार्च को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने समर्थन का रुख अपनाया है। बेलियाघाटा विधायक कुणाल घोष ने कहा कि कोलकाता पुलिस को रैली की अनुमति देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नीट और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे सीधे छात्रों के भविष्य से जुड़े हैं। जब देश के अन्य हिस्सों और दिल्ली में इस विषय को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं, तो कोलकाता में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने का कोई कारण नहीं होना चाहिए।
कुणाल घोष ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है। उन्होंने प्रशासन से आंदोलन को रोकने के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करने की अपील की।
भाजपा ने जताई आपत्ति
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने प्रस्तावित CJP Protest March पर सवाल उठाए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में किसी भी कीमत पर अशांति फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और प्रशासन स्थिति के अनुसार कदम उठाएगा।
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प्रशासन के फैसले पर टिकी नजर
फिलहाल कोलकाता पुलिस की ओर से रैली को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में सभी की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
यदि अनुमति मिलती है तो कोलकाता में बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। वहीं, अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में मामला और तूल पकड़ सकता है।
नीट प्रश्नपत्र लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में बहस जारी है। छात्र संगठन और विपक्षी दल परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इसी क्रम में सीजेपी ने देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू किए हैं।
CJP Protest March को लेकर बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी से पश्चिम बंगाल में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। प्रदर्शन की अनुमति और प्रशासनिक फैसले का असर आगे की राजनीतिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
भाजपा की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया गया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने शांतिपूर्ण विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार बताया है। प्रशासन की ओर से अभी तक रैली की अनुमति पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया गया है।
- किसी भी प्रदर्शन में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
- प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
- अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
- शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करें।
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