अमेरिका से आया ‘वारिस पंजाब दे’ का सक्रिय सदस्य समेत पांच गिरफ्तार

बहराइच में एसएसबी और पुलिस ने ‘वारिस पंजाब दे’ से जुड़े सक्रिय सदस्य समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया। फर्जी दस्तावेज, अमेरिकी पासपोर्ट और विदेशी सामान बरामद, नेटवर्क की जांच जारी।

News Saga Desk

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। अमेरिका से आया ‘वारिस पंजाब दे’ का सक्रिय सदस्य समेत पांच गिरफ्तार किए गए हैं। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और बहराइच पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे नेपाल के रास्ते भारत में अवैध घुसपैठ कराने की साजिश में शामिल था। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपितों के कब्जे से अमेरिकी पासपोर्ट, फर्जी पहचान पत्र, विदेशी बैंक कार्ड, भारतीय और नेपाली मुद्रा सहित कई अहम दस्तावेज और वाहन भी बरामद किए हैं।

खुफिया सूचना के आधार पर हुई संयुक्त कार्रवाई

पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि रुपईडीहा थाना क्षेत्र स्थित बीआईटी चेक पोस्ट पर विशेष खुफिया सूचना मिलने के बाद गुरुवार रात एसएसबी और पुलिस ने संयुक्त जांच अभियान चलाया। इसी दौरान नेपाल से भारत में प्रवेश कर रहे कुछ संदिग्ध लोगों को रोककर पूछताछ की गई।

प्रारंभिक जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने के बाद अमेरिका से आया ‘वारिस पंजाब दे’ का सक्रिय सदस्य समेत पांच गिरफ्तार किए गए। सुरक्षा एजेंसियों ने सभी आरोपितों को हिरासत में लेकर विस्तृत पूछताछ शुरू कर दी है।

कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार लोगों में अमेरिका के कैलिफोर्निया निवासी मनवीर सिंह ढिल्लों और पंजाब निवासी विक्रमजीत सिंह शामिल हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि दोनों प्रतिबंधित संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ से जुड़े बताए जा रहे हैं।

अमेरिका से आया ‘वारिस पंजाब दे’ का सक्रिय सदस्य समेत पांच गिरफ्तार

इनके अलावा तीन स्थानीय सहयोगियों—राहुल कुमार, सुरेश कुमार पाठक और दिलीप पाठक उर्फ राहुल पाठक—को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का आरोप है कि ये लोग नेपाल से भारत में अवैध प्रवेश कराने में सहयोग कर रहे थे।

फर्जी दस्तावेजों के जरिए घुसपैठ की साजिश

पूछताछ के दौरान सामने आया कि आरोपित फर्जी पहचान पत्र और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भारत में प्रवेश करने की योजना बना रहे थे। प्रारंभिक जांच के अनुसार, स्थानीय सहयोगियों की मदद से नेपाल के रास्ते सीमा पार करने की व्यवस्था की गई थी।

अमेरिका से आया ‘वारिस पंजाब दे’ का सक्रिय सदस्य समेत पांच गिरफ्तार

पुलिस ने बताया कि आरोपितों से पूछताछ में संगठन और उसकी गतिविधियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब पुलिस से भी संपर्क किया गया है ताकि आरोपितों के आपराधिक इतिहास और संभावित नेटवर्क की विस्तृत जानकारी जुटाई जा सके।

बरामद हुए विदेशी दस्तावेज और सामान

अमेरिका से आया ‘वारिस पंजाब दे’ का सक्रिय सदस्य समेत पांच गिरफ्तार होने के बाद तलाशी अभियान में कई महत्वपूर्ण सामान बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार आरोपितों के कब्जे से अमेरिकी पासपोर्ट, आईफोन, बैंक ऑफ अमेरिका का डेबिट कार्ड, अन्य विदेशी क्रेडिट कार्ड, फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस मिले हैं।

इसके अलावा भारतीय और नेपाली मुद्रा के साथ एक कार और मोटरसाइकिल भी बरामद की गई है। जांच एजेंसियां सभी दस्तावेजों और बरामद सामग्री की सत्यता की जांच करा रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका उपयोग किन गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।

पहले से दर्ज हैं गंभीर मुकदमे

पुलिस के अनुसार विक्रमजीत सिंह और मनवीर सिंह ढिल्लों के खिलाफ पंजाब में पहले से गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसी कारण उनके आपराधिक रिकॉर्ड और संगठन से जुड़े संबंधों की विस्तृत जांच की जा रही है।

बहराइच पुलिस ने भी गिरफ्तार सभी आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), फर्जी दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी और विदेशी नागरिकों से संबंधित प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।

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नेटवर्क की जांच में जुटीं सुरक्षा एजेंसियां

पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपितों के संपर्क देश के अन्य राज्यों या विदेशों तक फैले हैं या नहीं।

भारत-नेपाल सीमा पहले से ही सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील मानी जाती है। ऐसे में इस कार्रवाई को सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ जारी है और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ पूरे मामले के हर पहलू की जांच कर रही हैं, ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

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