26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन, सरकार के आश्वासन पर खत्म किया आंदोलन

सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद सरकार और 65 सांसदों के लिखित आश्वासन पर आमरण अनशन समाप्त किया। नीट, शिक्षा सुधार और छात्रों के हितों पर संसद में चर्चा का भरोसा मिला।

News Saga Desk

26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन। पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार तड़के 26 दिनों से जारी अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों से मिले लिखित आश्वासन के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल नीट प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा उठाना नहीं था, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और शिक्षा सुधार सुनिश्चित करना था।

अनशन समाप्त करने के बाद उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार की ओर से कोई लिखित आश्वासन नहीं मिला। इस पर उनका कहना था कि यदि सरकार इस मांग पर निर्णय नहीं लेती है, तो इसका नुकसान छात्रों को नहीं बल्कि स्वयं सरकार को उठाना पड़ेगा।

सरकार ने किन मुद्दों पर दिया आश्वासन?

सरकार की ओर से दिए गए लिखित आश्वासन में कहा गया है कि संसद में नीट प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही और शिक्षा सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा कराई जाएगी। इसके अलावा, हालिया नीट प्रश्नपत्र लीक प्रकरण से जुड़े आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने पर भी सकारात्मक विचार किया जाएगा।

सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर और 20 जुलाई को संसद मार्च में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। 26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन का फैसला इन्हीं लिखित आश्वासनों के आधार पर लिया गया।

28 जून से जारी था आमरण अनशन

सोनम वांगचुक ने 28 जून को जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के समर्थन में आमरण अनशन शुरू किया था। आंदोलन का मुख्य मुद्दा नीट प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा था।

अनशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने पर पहले उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश पर उन्हें गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहां से उन्होंने अपना आंदोलन जारी रखा।

जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह पहुंचे मिलने

वांगचुक ने अपने वीडियो संदेश में बताया कि शुक्रवार तड़के केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह उनसे मिलने पहुंचे। दोनों नेताओं ने सरकार की ओर से जारी लिखित आश्वासन उन्हें पढ़कर सुनाया और इसके बाद तरल पदार्थ पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया।

26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन

वांगचुक ने कहा कि पिछले दो दिनों से सरकार के साथ लगातार बातचीत चल रही थी। उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि केवल मौखिक भरोसे पर वह अनशन समाप्त नहीं करेंगे। लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही उन्होंने आंदोलन खत्म करने का निर्णय लिया।

65 सांसदों ने भी किया अनशन समाप्त करने का आग्रह

26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन के पीछे विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। वांगचुक ने बताया कि कई सांसद स्वयं उनसे मिलने पहुंचे, जबकि अन्य ने हस्ताक्षरयुक्त पत्र भेजकर आंदोलन समाप्त करने का अनुरोध किया।

सांसदों ने आश्वासन दिया कि संसद में परीक्षा प्रणाली की खामियों, प्रश्नपत्र लीक और जवाबदेही तय करने पर गंभीर चर्चा होगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर क्या बोले वांगचुक?

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर वांगचुक ने कहा कि सरकार इस विषय पर कोई लिखित आश्वासन देने की स्थिति में नहीं थी। उन्होंने कहा कि उनके सामने दो विकल्प थे—या तो अनिश्चितकाल तक अनशन जारी रखें या छात्रों के व्यापक हित में उन मुद्दों पर मिले लिखित आश्वासन को स्वीकार करें जिनका सीधा संबंध उनके भविष्य से है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार समय रहते इस मुद्दे पर निर्णय नहीं लेती है तो इसका राजनीतिक नुकसान स्वयं सरकार को उठाना पड़ सकता है।

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आंदोलन का उद्देश्य और आगे की राह

वांगचुक ने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं करने का लिखित आश्वासन मिला। उन्होंने लद्दाख का उदाहरण देते हुए कहा कि एफआईआर का बोझ लंबे समय तक युवाओं के भविष्य को प्रभावित करता है।

अनशन समाप्त करते समय उन्होंने कहा, “26 दिनों बाद तरल पदार्थ का स्वाद बेहद अच्छा लग रहा है, लेकिन मेरी भूख खत्म नहीं हुई है। यह भूख जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की है।”

उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण रखें और किसी भी प्रकार की हिंसा या असामाजिक तत्वों से दूरी बनाए रखें। अनशन समाप्त करने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा—“भूख का अंत… जवाबदेही की शुरुआत।”

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