JPSC-JSSC भर्ती में अनियमितता के विरोध में JLKM का धरना

NEWS SAGA DESK

खूंटी में JLKM ने JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में धरना दिया। कार्यकर्ताओं ने पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त नियुक्ति की मांग की।

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। JPSC-JSSC भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) ने मंगलवार को खूंटी में धरना दिया। पार्टी के राज्यव्यापी आंदोलन के तहत जिला इकाई की ओर से उपायुक्त कार्यालय के समक्ष आयोजित इस धरने में पार्टी के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।

धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के साथ-साथ भ्रष्टाचार मुक्त चयन प्रक्रिया लागू करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और समान अवसर मिलना चाहिए।

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग

धरने का नेतृत्व JLKM के खूंटी जिला अध्यक्ष कुमार ब्रजकिशोर ने किया। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े भर्ती मामलों में किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि JPSC और JSSC भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और अभ्यर्थियों की शिकायतों का समयबद्ध तरीके से समाधान किया जाए।

धरने में शामिल छात्र-छात्राओं ने कहा कि सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए युवा लंबे समय से मेहनत कर रहे हैं। ऐसे में परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर किसी भी तरह का विवाद या कथित अनियमितता अभ्यर्थियों के भविष्य पर सीधा असर डालती है।

आंदोलन को व्यापक करने की चेतावनी

कार्यक्रम के दौरान JLKM के केंद्रीय संयुक्त संगठन महासचिव मनीष साहू ने कहा कि अगर सरकार युवाओं की मांगों को गंभीरता से नहीं लेती है तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली का आरोप लगाते हुए कहा कि इसका असर राज्य के हजारों युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है।

उन्होंने सरकार से युवाओं की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने और नियुक्ति प्रक्रिया में भरोसा बहाल करने की मांग की। साथ ही कहा कि यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है तो संगठन राज्यव्यापी आंदोलन को और तेज करेगा।

युवाओं के रोजगार पर भी जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वकर्मा उरांव ने पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया लागू करने की मांग उठाई। वहीं राकेश ने कहा कि झारखंड के युवाओं को उनके अधिकार और रोजगार के पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

सरोजिनी संगा, पम्मी कुमारी, तुलसी और सुरेश टोपनो ने भी युवाओं से जुड़े रोजगार के मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा कि झारखंड के बड़ी संख्या में छात्र आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। ऐसे में सरकारी योजनाओं के साथ-साथ स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करना भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने लोगों से अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की। साथ ही लोगों से जागरूक होकर मतदान करने का आह्वान भी किया गया।

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