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धनबाद की पोषण सखियां सम्मानजनक मानदेय समेत अन्य मांगों को लेकर 7 अगस्त को विधानसभा के सामने धरना देंगी। मांगें नहीं मानीं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी।

सम्मानजनक मानदेय और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर पोषण सखियां 7 अगस्त को विधानसभा घेरेंगी। झारखंड राज्य एकीकृत पोषण सखी संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्य विधानसभा के समक्ष एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। संगठन ने राज्यभर की पोषण सखियों से बड़ी संख्या में रांची पहुंचकर आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। संघ ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
इस आंदोलन की जानकारी मुख्यमंत्री सचिवालय को भी लिखित रूप से भेजी गई है। संगठन का कहना है कि पोषण सखियां लंबे समय से कम मानदेय पर काम कर रही हैं और बढ़ती महंगाई के बीच परिवार चलाना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। संघ ने सरकार से मानदेय में बढ़ोतरी के साथ-साथ ड्रेस कोड, बीमा और ईपीएफ जैसी सुविधाएं लागू करने की मांग की है।
7 अगस्त को विधानसभा के सामने धरना
झारखंड राज्य एकीकृत पोषण सखी संघ ने 7 अगस्त को विधानसभा के समक्ष एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन का निर्णय लिया है। संगठन के मुताबिक, इस आंदोलन में राज्य के अलग-अलग जिलों से पोषण सखियों के शामिल होने की उम्मीद है।
संघ ने सभी पोषण सखियों से अधिक से अधिक संख्या में रांची पहुंचने की अपील की है। पोषण सखियां 7 अगस्त को विधानसभा घेरेंगी और अपनी मांगों को सरकार के सामने मजबूती से रखेंगी।
संगठन का कहना है कि यह प्रदर्शन लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर किया जा रहा है। यदि सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होती है, तो आगे राज्यव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
10 वर्षों से ₹3000 मानदेय का दावा
धनबाद जिला अध्यक्ष सह प्रदेश सलाहकार डिम्पल चौबे ने कहा कि पोषण सखियां पिछले करीब 10 वर्षों से केवल 3,000 रुपये मासिक मानदेय पर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस अवधि में महंगाई लगातार बढ़ी है, लेकिन मानदेय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई।
डिम्पल चौबे के मुताबिक, कम मानदेय के कारण पोषण सखियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन की प्रमुख मांगों में सम्मानजनक मानदेय तय करना शामिल है।
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प्रदेश अध्यक्ष अंजनी कुमारी ने कहा कि सरकार की ओर से पोषण सखियों की पुनर्बहाली किया जाना स्वागतयोग्य कदम था। हालांकि, उनके अनुसार अब तक ड्रेस कोड, बीमा और अन्य जरूरी सुविधाएं पूरी तरह लागू नहीं की गई हैं।
उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं को लेकर विधानसभा में सहमति बनने की बात कही गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर पोषण सखियों को अभी तक इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाया है।
संघ का कहना है कि काम करने वाली महिलाओं को सुरक्षा और पहचान से जुड़ी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। इसी मांग को लेकर 7 अगस्त का प्रदर्शन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
EPF और जीवन बीमा की सुविधा नहीं मिलने का आरोप
प्रदेश महासचिव पार्वती सोरेन ने आरोप लगाया कि पोषण सखियों को अभी तक ईपीएफ और जीवन बीमा जैसी मूलभूत सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का लाभ नहीं मिला है।
उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा देने वाली पोषण सखियों के भविष्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार को इन मांगों पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार जल्द कार्रवाई नहीं करती है, तो 7 अगस्त के धरने के बाद राज्यव्यापी उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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