JTET नहीं कराने पर शिक्षा सचिव को हाई कोर्ट का शो-कॉज

NEWS SAGA DESK

झारखंड हाई कोर्ट ने JTET परीक्षा नहीं कराने पर स्कूली शिक्षा सचिव को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने अवमानना चार्ज तय करने पर जवाब मांगा।

स्कूली शिक्षा सचिव को शो-कॉज नोटिस

झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी JTET को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट के पूर्व आदेश के बावजूद निर्धारित समयसीमा में JTET परीक्षा आयोजित नहीं किए जाने के मामले में उच्च न्यायालय ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान सचिव से पूछा गया कि न्यायालय के निर्देश का अनुपालन नहीं करने के लिए उनके खिलाफ अवमानना का आरोप क्यों न तय किया जाए।

मामला उस समय गंभीर हो गया जब अदालत को बताया गया कि पूर्व में सचिव स्वयं एकल पीठ के समक्ष उपस्थित हुए थे और उन्होंने JTET आयोजित कराने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद तय समय के भीतर परीक्षा आयोजित नहीं होने पर अदालत ने मामले को अवमानना की दृष्टि से देखा है।

तीन महीने में JTET कराने का था आदेश

इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने पूर्व में राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया था। अदालत का उद्देश्य निर्धारित समयसीमा में परीक्षा प्रक्रिया पूरी कराना था, ताकि शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।

लेकिन आरोप है कि निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी JTET का आयोजन नहीं किया गया। इसके बाद मामले से जुड़े पक्ष की ओर से अदालत के आदेश का पालन नहीं होने की शिकायत की गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया और संबंधित विभाग के सचिव से जवाब मांगा।

शिक्षा सचिव से मांगा गया स्पष्टीकरण

न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव को शो-कॉज नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट किया कि वह बताएं कि कोर्ट के निर्देश का पालन निर्धारित समय में क्यों नहीं किया गया।

अदालत ने यह भी पूछा है कि आदेश का अनुपालन नहीं करने के लिए सचिव के खिलाफ अवमानना का आरोप क्यों न तय किया जाए। इसका अर्थ है कि यदि सचिव की ओर से दिया गया स्पष्टीकरण अदालत को संतोषजनक नहीं लगता है, तो आगे अवमानना की कार्रवाई की दिशा में मामला बढ़ सकता है।

पहले अदालत में दिया गया था आश्वासन

मामले की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि सचिव पहले स्वयं अदालत में उपस्थित हुए थे। उस दौरान उन्होंने JTET कराने का आश्वासन दिया था। इसी आधार पर अदालत ने परीक्षा आयोजित करने के लिए समयसीमा तय की थी

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अब निर्धारित अवधि में परीक्षा नहीं होने पर अदालत ने जवाब-तलब किया है। इससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और न्यायालय के आदेशों के अनुपालन को लेकर भी सवाल उठे हैं।

JTET का आयोजन राज्य में शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों को आगे की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पात्रता हासिल करने का अवसर मिलता है। ऐसे में परीक्षा में देरी का सीधा असर लंबे समय से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है।

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