Wahab Alam को बंगाल से गिरफ्तार किया गया। STF के मुताबिक वह बांग्लादेश में ठिकाना बनाकर नई पहचान से लौटने की तैयारी में था और ISI के लिए सैन्य जानकारी जुटा रहा था।
News Saga Desk
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के हाबरा से गिरफ्तार पाकिस्तानी नागरिक Wahab Alam को लेकर जांच में कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा किया गया है। विशेष कार्यबल (STF) की पूछताछ के मुताबिक, वह कुछ समय के लिए बांग्लादेश जाने और वहां सुरक्षित ठिकाने पर रहने के बाद नई पहचान तथा नए काम के साथ पश्चिम बंगाल लौटने की योजना बना रहा था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए भारत के पूर्वी क्षेत्र से जुड़ी संवेदनशील सैन्य और अन्य रणनीतिक जानकारियां जुटा रहा था।
बांग्लादेश जाने की कथित योजना क्या थी?
जांच अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान में बैठे उसके कथित संचालकों ने उसे कुछ समय के लिए भारत से बाहर जाने की सलाह दी थी। योजना के तहत उसे बांग्लादेश पहुंचकर जेसोर में रहने वाले कथित ISI एजेंट पावेल से संपर्क करना था। आरोप है कि पावेल को उसके लिए सुरक्षित ठिकाने की व्यवस्था करनी थी।
STF की पूछताछ के आधार पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, बांग्लादेश में कुछ समय रहने के बाद Wahab Alam को नई पहचान और नए काम के साथ पश्चिम बंगाल वापस भेजने की योजना थी। हालांकि, इस पूरी योजना से जुड़े दावों की जांच अभी जारी है और एजेंसियां उसके बयानों तथा डिजिटल साक्ष्यों का सत्यापन कर रही हैं।
सेना, नौसेना और रेलवे की जानकारी जुटाने का आरोप
जांच एजेंसियों का आरोप है कि Wahab Alam को पश्चिम बंगाल और भारत के पूर्वी हिस्से में सेना, नौसेना तथा रेलवे से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्र करने का काम सौंपा गया था। अधिकारियों के अनुसार, उसके पास से बरामद नेटबुक की जांच भी की जा रही है।

इसी डिजिटल जांच के दौरान बांग्लादेश में सक्रिय बताए जा रहे पावेल के बारे में जानकारी मिलने की बात सामने आई है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दोनों के बीच किस तरह का संपर्क था और कथित नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
मतदाता सूची से नाम हटने के बाद सतर्क हुए संचालक
पूछताछ में कथित तौर पर Wahab Alam ने बताया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान उसका नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद उसके पाकिस्तान स्थित कथित संचालक सतर्क हो गए थे।
जांच के अनुसार, इसके बाद उसे कोलकाता के तोपसिया इलाके से हटकर भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के किसी जिले में कुछ समय के लिए रहने की सलाह दी गई। इसी क्रम में उसने उत्तर 24 परगना जिले के हाबरा में नया ठिकाना बनाया। STF ने कार्रवाई करते हुए उसे हाबरा से गिरफ्तार किया।
स्थानीय सहयोगी की भी गिरफ्तारी
Wahab Alam की गिरफ्तारी के बाद STF ने उसके कथित स्थानीय सहयोगी मोहम्मद इजाज को भी गिरफ्तार किया। जांच के मुताबिक, आलम पहले तोपसिया इलाके में इजाज के घर किरायेदार के रूप में रह रहा था।
एजेंसी का आरोप है कि इजाज ने उसके लिए कथित तौर पर फर्जी भारतीय पहचान दस्तावेज तैयार कराने में मदद की। जांच में आधार कार्ड, पैन कार्ड और बाद में मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है। अब जांच अधिकारी इन दस्तावेजों की उत्पत्ति, इस्तेमाल और उन्हें तैयार कराने में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रहे हैं।
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2012 में भारत आने का दावा
STF के अनुसार, Wahab Alam वर्ष 2012 में भारत-नेपाल सीमा के रास्ते भारत में दाखिल हुआ था। इसके बाद उसने पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों में ठिकाने बदलकर रहने की कोशिश की। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतने वर्षों के दौरान उसने किन लोगों से संपर्क किया और उसके कथित नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा था।
अधिकारियों के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि भारत में रहने के दौरान उसने किन संवेदनशील स्थानों या संस्थानों से संबंधित जानकारी जुटाई और यह जानकारी कथित तौर पर किस माध्यम से बाहर भेजी गई।
अभी जांच का फोकस Wahab Alam के डिजिटल उपकरणों, फर्जी पहचान दस्तावेजों, स्थानीय संपर्कों और पाकिस्तान तथा बांग्लादेश से जुड़े कथित नेटवर्क पर है। STF उसके बयानों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने के साथ-साथ बरामद इलेक्ट्रॉनिक सामग्री की जांच कर रही है।
Public information के लिहाज से यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जांच एजेंसियां विदेशी नागरिक की कथित अवैध पहचान, सीमा पार संपर्क और संवेदनशील सूचनाएं जुटाने के आरोपों की जांच कर रही हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्य सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
मामला सामने आने के बाद सीमा से जुड़े जिलों में संदिग्ध गतिविधियों, फर्जी दस्तावेजों और विदेशी नागरिकों की पहचान की निगरानी को लेकर सवाल उठे हैं। जांच में यदि कथित नेटवर्क की पुष्टि होती है, तो सुरक्षा एजेंसियां इससे जुड़े अन्य लोगों और संपर्कों की भी तलाश कर सकती हैं।
फिलहाल STF की जांच जारी है और अधिकारियों का ध्यान इस बात पर है कि Wahab Alam की कथित योजना में कौन-कौन लोग शामिल थे, बांग्लादेश में उसका संपर्क कितना मजबूत था और संवेदनशील सूचनाओं से संबंधित आरोपों के पीछे वास्तविक नेटवर्क कितना विस्तृत है।
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