नाग पंचमी 2026 और सावन की तीसरी सोमवारी 17 अगस्त को एक साथ है। जानें पंचमी तिथि, नक्षत्र, शुभ योग, पूजा सामग्री और घर पर नागदेव की पूजा विधि।
रांचीः– नाग पंचमी 2026 और सावन की तीसरी सोमवारी का विशेष संयोग सोमवार, 17 अगस्त को बन रहा है। लंबे समय बाद एक ही दिन सावन सोमवार और नाग पंचमी पड़ने से श्रद्धालुओं में खास उत्साह है। इस दिन भक्त भगवान शिव के साथ नागदेव की भी पूजा-अर्चना करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार को शिव आराधना और नाग पंचमी पर नागदेव की पूजा करने से सुख-शांति, समृद्धि और परिवार के मंगल की कामना पूरी होती है।

नाग पंचमी 2026 के अवसर पर राजधानी रांची के विभिन्न शिवालयों में विशेष पूजा की तैयारियां की गई हैं। पहाड़ी मंदिर समेत कई प्रमुख मंदिरों में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है। भक्त शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के साथ नागदेव को दूध, लावा, फूल और अक्षत अर्पित करेंगे।
शाम तक रहेगी पंचमी तिथि
पंचमी तिथि सोमवार की शाम 6:49 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है। पंडित कौशल कुमार मिश्र के अनुसार, सोमवार सुबह 6:45 बजे तक हस्त नक्षत्र रहेगा। इसके बाद चित्रा नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा।
इस दौरान साध्य के साथ शुभ योग का संयोग भी बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं में शुभ योग को पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। ऐसे में भगवान शिव और नागदेव की आराधना को विशेष फलदायी माना जा रहा है।
हालांकि, पूजा के समय को लेकर अलग-अलग पंचांगों में मामूली अंतर हो सकता है। श्रद्धालु अपने क्षेत्र के पंचांग या स्थानीय पुरोहित की सलाह के अनुसार पूजा का समय तय कर सकते हैं।
शिव के साथ नागदेव की पूजा का महत्व
नाग को भगवान शिव का आभूषण माना जाता है। भगवान शिव के गले में नाग के विराजमान होने के कारण नाग पंचमी पर नागदेव की पूजा के साथ शिव आराधना का भी विशेष महत्व बताया गया है।
सावन सोमवार भगवान शिव की उपासना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और फूल चढ़ाते हैं। वहीं नाग पंचमी पर नागदेव की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की जाती है।
नाग पंचमी 2026 और सावन सोमवार का एक साथ पड़ना श्रद्धालुओं को एक ही दिन दोनों धार्मिक परंपराओं का पालन करने का अवसर दे रहा है।
रांची के शिवालयों में विशेष तैयारी
राजधानी रांची के विभिन्न शिव मंदिरों के अलावा पहाड़ी मंदिर में भी इस अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की संभावना है। मंदिरों में सुबह से ही जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का दौर शुरू होने की उम्मीद है।
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पहाड़ी मंदिर स्थित नाग देवता के मंदिर में भक्त नागदेव को दूध, लावा, फूल और अन्य प्रसाद अर्पित कर परिवार के लिए सुख-शांति और समृद्धि की कामना करेंगे। विशेष पर्व को देखते हुए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन के लिए भी आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं।
कई श्रद्धालु नागदेव की धातु से बनी आकृति का दान भी करते हैं। वहीं कुछ परिवारों में घर के मुख्य द्वार पर नाग की आकृति बनाकर उसकी पूजा करने की परंपरा है।
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